अंतरिक्ष की दुनिया में चीन की नई चाल, इलेक्ट्रिक रॉकेट से मस्क को टक्कर देने की तैयारी
स्पेस वॉर की नई कहानी, चीन के इलेक्ट्रिक रॉकेट के सामने एलन मस्क की तकनीक
New Delhi: अंतरिक्ष की दुनिया में अब एक नई तकनीकी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। चीन ने इलेक्ट्रिक रॉकेट लॉन्चर तकनीक पर तेजी से काम शुरू किया है, जिसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, Elon Musk की कंपनी SpaceX अपने शक्तिशाली केमिकल रॉकेट इंजन के दम पर पहले से ही अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी बढ़त बनाए हुए है।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या चीन की नई इलेक्ट्रिक रॉकेट तकनीक, एलन मस्क के रॉकेटों को चुनौती दे पाएगी?
इलेक्ट्रिक रॉकेट लॉन्चर क्या है?
इलेक्ट्रिक रॉकेट लॉन्चर एक ऐसी तकनीक है जिसमें रॉकेट को आगे बढ़ाने के लिए पारंपरिक रासायनिक ईंधन की जगह बिजली आधारित प्रणोदन (Electric Propulsion) का इस्तेमाल किया जाता है।
इस तकनीक में ईंधन की खपत कम होती है और लंबे अंतरिक्ष अभियानों के लिए इसे अधिक कुशल माना जाता है। हालांकि, इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इससे पैदा होने वाला थ्रस्ट (धक्का) केमिकल रॉकेट की तुलना में काफी कम होता है।
एलन मस्क के केमिकल रॉकेट क्यों हैं मजबूत?
SpaceX के रॉकेट जैसे Falcon 9 और Starship तरल ऑक्सीजन और मीथेन जैसे रासायनिक ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। इनकी सबसे बड़ी ताकत है तेज गति से भारी पेलोड को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने की क्षमता।
केमिकल रॉकेट कुछ ही मिनटों में भारी वजन को अंतरिक्ष तक पहुंचा सकते हैं, इसलिए उपग्रह प्रक्षेपण और मानव अंतरिक्ष मिशनों में इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है।
चीन की इलेक्ट्रिक तकनीक की खासियत
चीन की इलेक्ट्रिक रॉकेट तकनीक का फोकस लंबी दूरी के अंतरिक्ष अभियानों, उपग्रहों की कक्षा सुधार और भविष्य के डीप स्पेस मिशनों पर है।
इसके फायदे:
ईंधन की खपत कम
लंबे समय तक इंजन चलाने की क्षमता
अंतरिक्ष में बेहतर दक्षता
छोटे उपग्रहों के लिए उपयोगी
लेकिन भारी रॉकेट लॉन्च करने के मामले में यह अभी केमिकल रॉकेटों से पीछे है।
क्या चीन सीधे SpaceX को चुनौती दे सकता है?
फिलहाल दोनों तकनीकों का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए होता है। SpaceX का लक्ष्य भारी पेलोड, अंतरिक्ष यात्रियों और बड़े मिशनों को लॉन्च करना है, जबकि इलेक्ट्रिक प्रणोदन लंबी अवधि के अंतरिक्ष संचालन में ज्यादा उपयोगी है।
भविष्य में दोनों तकनीकों का मिश्रण भी देखने को मिल सकता है, जहां रॉकेट लॉन्च के लिए केमिकल इंजन और अंतरिक्ष में आगे की यात्रा के लिए इलेक्ट्रिक प्रणोदन का इस्तेमाल किया जाए।
अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
अमेरिका और चीन के बीच अंतरिक्ष तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। चीन अपने अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्र मिशन और नए लॉन्च सिस्टम पर तेजी से काम कर रहा है, जबकि SpaceX निजी अंतरिक्ष उद्योग में क्रांति ला चुका है।
आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी तकनीक अंतरिक्ष यात्राओं को ज्यादा सस्ता, तेज और प्रभावी बना पाती है।