नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ बढ़ाने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से नई रणनीति तैयार किए जाने का दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें बॉर्डर एक्शन टीमों यानी बैट को मजबूत करने और छोटी टीमों के जरिए घुसपैठ में मदद पहुंचाने की योजना शामिल है। हालांकि, इन कथित तैयारियों को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में किसी नामित अधिकारी का सार्वजनिक बयान या आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए इसे खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आया दावा माना जाना चाहिए। 
रिपोर्ट में मेजर जनरल मुहम्मद शमरेज खान को आईएसआई का नया प्रमुख बताते हुए दावा किया गया है कि उनके नेतृत्व में बैट से जुड़ी रणनीति पर काम हो रहा है। एक अनाम खुफिया अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तानी सेना और आतंकी समूहों के सहयोग से कई छोटी टीमें बनाने की तैयारी है। कथित उद्देश्य भारतीय सुरक्षा बलों को उलझाकर आतंकियों की घुसपैठ में सहायता करना है। संबंधित नियुक्ति और नई तैनाती की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं हो सकी है। 
इस दावे के बीच जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ रोकने के लिए पहले से जारी सुरक्षा प्रयास प्रासंगिक हैं। पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने 13 अक्टूबर को हुई परिचालन समीक्षा बैठक में खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों को तेज करने और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने पूरे केंद्रशासित प्रदेश में सतर्कता बनाए रखने के साथ गश्त और क्षेत्र में सुरक्षा बलों की प्रभावी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में उभरती सुरक्षा चुनौतियों और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की गई थी। 
डीजीपी ने जिला पुलिस, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा बलों के बीच निकट समन्वय की जरूरत भी बताई थी। अधिकारियों को सूचनाएं समय पर साझा करने, संवेदनशील इलाकों की निगरानी मजबूत करने और उपलब्ध तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए। स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क बनाए रखने पर भी जोर था, ताकि सुरक्षा से जुड़ी जानकारी समय पर मिल सके। ये निर्देश सामान्य सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा थे; इन्हें कथित नई बैट योजना की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता। 
इससे पहले सितंबर में भी अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बॉर्डर प्रोटेक्शन ग्रिड की समीक्षा की गई थी। उस बैठक में सीमा पार से घुसपैठ रोकने के उपायों और तैनात बलों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई। इस सुरक्षा व्यवस्था में सेना, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस की भूमिका है। नियंत्रण रेखा तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ रोधी बाधा प्रणाली भी सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सितंबर की समीक्षा से जुड़ी जानकारी के अनुसार, संबंधित अवधि में कानाचक और कठुआ में सीमा पार कर आए दो पाकिस्तानी नागरिक पकड़े गए थे। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा इंतजामों और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया गया। हालांकि, सीमा पार किसी व्यक्ति के पकड़े जाने और संगठित आतंकी घुसपैठ की योजना के बीच संबंध स्थापित करने के लिए अलग साक्ष्य जरूरी होते हैं। उपलब्ध विवरण इन घटनाओं को वर्तमान बैट संबंधी दावे से सीधे नहीं जोड़ता। 
सुरक्षा के लिहाज से किसी कथित योजना, उसकी तैयारी और वास्तविक घुसपैठ की घटना में अंतर समझना जरूरी है। टीम गठित करने की सूचना अपने आप में यह साबित नहीं करती कि संबंधित दल सीमा पर तैनात हो चुके हैं या उन्होंने भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। इसी तरह किसी रणनीति के उद्देश्य का दावा और उस रणनीति की सफलता दो अलग बातें हैं। इस मामले में उपलब्ध रिपोर्ट मुख्य रूप से तैयारियों तथा संभावित मंशा का विवरण देती है। नई खबर में सबसे अहम सवाल यही है कि कथित बदलाव कितना व्यापक है और उसके समर्थन में कौन से प्रमाण उपलब्ध हैं। अभी किसी निश्चित संख्या में बैट टीमों की वास्तविक तैनाती, उनके स्थान या किसी नए हमले की पुष्टि सामने नहीं रखी गई है। इसलिए संभावित खतरे को लेकर सतर्कता की जरूरत और किसी घटना को पुष्ट तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बीच स्पष्टता बनाए रखना आवश्यक है।
घुसपैठ रोकने की व्यवस्था में सीमा पर निगरानी के साथ अंदरूनी सुरक्षा और सूचनाओं का आदान-प्रदान भी महत्वपूर्ण होता है। अलग-अलग एजेंसियों के पास मौजूद जानकारी को समय पर जोड़ने से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में मदद मिल सकती है। हालिया सुरक्षा समीक्षा में समन्वय और स्थानीय संपर्क पर दिया गया जोर इसी व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह केवल सीमा की चौकसी तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि विभिन्न स्तरों पर तैयारियों से जुड़ा मामला है। फिलहाल बैट टीमों से संबंधित नई रणनीति की खबर को सूत्र आधारित जानकारी के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है। दूसरी ओर, घुसपैठ रोकने के लिए सुरक्षा समीक्षा, बेहतर निगरानी और एजेंसियों के समन्वय संबंधी निर्देश सार्वजनिक रिपोर्टों में दर्ज हैं। आगे किसी आधिकारिक बयान या प्रमाणित घटनाक्रम से कथित योजना की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
Tags: