न्यूयॉर्क: विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय सुधार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और 'विकास के अधिकार पर समझौते' (Covenant on the Right to Development) को जल्द अपनाने का समर्थन किया।
उन्होंने 'विकास के अधिकार पर घोषणा' की 40वीं वर्षगांठ मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सत्र में भारत का राष्ट्रीय बयान देते हुए ये बातें कहीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पर पोस्ट किया, "सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 'विकास के अधिकार पर घोषणा' की 40वीं वर्षगांठ मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सत्र में भारत का राष्ट्रीय बयान दिया। उन्होंने समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय सुधार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और 'विकास के अधिकार पर समझौते' को जल्द अपनाने का समर्थन किया।"
संयुक्त राष्ट्र (UN) के बयान के अनुसार, 'विकास के अधिकार पर घोषणा' यह बताती है कि विकास का अधिकार एक ऐसा मौलिक मानवाधिकार है जिसे छीना नहीं जा सकता। इसके तहत हर व्यक्ति और सभी लोगों को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास में भाग लेने, योगदान करने और उसका लाभ उठाने का अधिकार है, जिसमें सभी मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रताओं को पूरी तरह से हासिल किया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा, "इसे अपनाए जाने के बाद से ही, इस घोषणा ने सतत विकास, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समावेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का मार्गदर्शन किया है। हालांकि पिछले चार दशकों में जीवन स्तर में सुधार, करोड़ों लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकालने और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने में काफी प्रगति हुई है, लेकिन यह प्रगति एक समान नहीं रही है।"
इसमें आगे कहा गया, "कई देशों को ऐसी संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो उनके विकास की संभावनाओं को सीमित करती हैं, साथ ही वैश्विक स्तर पर फंडिंग की कमी भी बनी हुई है। इस घोषणा की 40वीं वर्षगांठ एक अनूठा अवसर प्रदान करती है ताकि विकास के अधिकार को आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सभी के लिए अधिक समावेशी, टिकाऊ और न्यायपूर्ण भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए एक मुख्य ढांचे के रूप में फिर से स्थापित किया जा सके।"