नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी को लेकर भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि रूस की सेना में कार्यरत भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है। वहीं, यूक्रेन में हिरासत में लिए गए एक भारतीय नागरिक को स्वदेश वापस लाने के लिए भी यूक्रेनी सरकार से संपर्क किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित नियमित प्रेस वार्ता के दौरान रूस और यूक्रेन में मौजूद भारतीय नागरिकों के संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के अधिकारियों के साथ राजनयिक स्तर पर बातचीत की जा रही है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
यूक्रेन में हिरासत में लिए गए भारतीय की रिहाई के प्रयास जारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यूक्रेन में एक भारतीय नागरिक हिरासत में है। उसे भारत वापस लाने के लिए यूक्रेनी सरकार के साथ बातचीत चल रही है।उन्होंने कहा कि भारतीय अधिकारियों ने संबंधित नागरिक की स्थिति और उसके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए कांसुलर मुलाकातें भी की हैं। भारतीय दूतावास इस मामले पर नजर बनाए हुए है।जायसवाल के अनुसार, भारत सरकार का प्रयास है कि हिरासत में मौजूद भारतीय नागरिक की जल्द वापसी सुनिश्चित हो सके। हालांकि, उसकी रिहाई की निश्चित तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में यूक्रेन सरकार के साथ बातचीत जारी है और भारतीय पक्ष आवश्यक राजनयिक सहायता उपलब्ध करा रहा है।
रूसी सेना में शामिल भारतीयों को वापस लाने की कोशिश
रूस में सैन्य सेवा से जुड़े भारतीय नागरिकों की वापसी भी भारत सरकार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।विदेश मंत्रालय की ओर से 7 अक्टूबर को साझा जानकारी के अनुसार, लगभग 259 भारतीय नागरिकों के रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की सूचना मिली थी। इनमें से 139 भारतीय नागरिकों को भारत सरकार के प्रयासों से सैन्य सेवा से मुक्त कराया जा चुका था।वहीं, 69 भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में होने की जानकारी के आधार पर उनके ठिकाने और रिहाई को लेकर रूसी अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा था।बुधवार को विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि रूस में मौजूद भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
नौकरी के झांसे में फंसने वालों को लेकर चिंता
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारतीय नागरिकों की सैन्य भर्ती का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से चर्चा में रहा है। कई मामलों में भारतीय युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी, बेहतर वेतन और अन्य सुविधाओं का प्रस्ताव देकर रूस भेजे जाने की शिकायतें सामने आई थीं।कुछ परिवारों ने आरोप लगाया था कि उनके रिश्तेदारों को सामान्य नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रूस भेजा गया, लेकिन बाद में उन्हें सैन्य सेवा में शामिल कर लिया गया।विदेश मंत्रालय ने बताया कि ऐसे मामलों में शामिल संदिग्ध ट्रैवल एजेंटों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कार्रवाई की है।सरकार ने विदेश में नौकरी तलाशने वाले नागरिकों को अप्रमाणित एजेंटों और संदिग्ध रोजगार प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह भी दी है।
विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को दी चेतावनी
विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे रूस की सेना में भर्ती होने से संबंधित प्रस्तावों से दूर रहें।मंत्रालय के अनुसार, रूस में सैन्य सेवा से जुड़ना जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। सरकार पिछले दो वर्षों के दौरान कई बार इस संबंध में चेतावनी जारी कर चुकी है।30 सितंबर 2026 को जारी परामर्श में भी भारतीय नागरिकों से अपील की गई थी कि वे विदेश में रोजगार स्वीकार करने से पहले नौकरी देने वाली संस्था और संबंधित एजेंट की विश्वसनीयता की जांच करें।विदेश मंत्रालय ने इस बात पर चिंता जताई कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद भारतीय नागरिकों के रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की खबरें सामने आती रही हैं।सरकार ने स्पष्ट किया कि अधिक वेतन या आर्थिक लाभ के लालच में किसी युद्धरत देश की सेना में शामिल होना बेहद जोखिम भरा निर्णय हो सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में भारतीयों की मौत पर भी चिंता
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में भारतीय नागरिकों की मौत के मामले भी सामने आए हैं।अगस्त 2026 में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया था कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार रूसी सेना में शामिल 51 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी थी।इन घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों की ओर से अपने परिजनों के बारे में जानकारी प्राप्त करने, पार्थिव शरीर भारत लाने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।भारत सरकार ने रूसी अधिकारियों के समक्ष इन विषयों को उठाया है। साथ ही प्रभावित परिवारों की सहायता और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रियाओं को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भारत का जोर बातचीत और कूटनीति पर
भारत सरकार लगातार रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर देती रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से संघर्ष समाप्त करने का समर्थन कर चुके हैं।विदेश मंत्री जयशंकर ने अक्टूबर में संसदीय सलाहकार समिति की बैठक के दौरान भी रूस के साथ भारत के संबंधों और यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए किए जा रहे राजनयिक प्रयासों की जानकारी दी थी।भारत ने स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के जरिए संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।
भारतीयों की सुरक्षित वापसी सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से स्पष्ट है कि भारत सरकार रूस और यूक्रेन से जुड़े भारतीय नागरिकों के मामलों को लगातार उठा रही है।यूक्रेन में हिरासत में मौजूद भारतीय की रिहाई के लिए वहां की सरकार से बातचीत की जा रही है, जबकि रूसी सेना में शामिल भारतीयों को सैन्य सेवा से मुक्त कराने और स्वदेश लाने के प्रयास जारी हैं।विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक राजनयिक और कांसुलर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।फिलहाल इन मामलों में बातचीत जारी है और शेष भारतीय नागरिकों की वापसी की कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। ऐसे में प्रभावित परिवारों की निगाहें भारत सरकार और संबंधित देशों के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हुई हैं।
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