पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सेना पर बड़ा हमला, IED धमाके में मेजर की मौत
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों और संदिग्ध आतंकवादियों के बीच हुई कार्रवाई में सेना के एक मेजर की मौत हो गई, जबकि चार आतंकवादी मारे गए हैं। पाकिस्तानी सेना ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के अनुसार, 18 अक्टूबर को खुफिया जानकारी के आधार पर बलूचिस्तान के ग्वादर और कलात जिलों में अलग-अलग अभियान चलाए गए थे। इस दौरान कलात जिले में चार संदिग्ध आतंकवादी मारे गए, जबकि ग्वादर जिले में विस्फोटक उपकरण की चपेट में आने से मेजर वजाहत वहीद की मौत हो गई। सेना ने अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद करने का भी दावा किया है।
पाकिस्तानी सेना ने इन अभियानों को आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा बताया है। सेना के मुताबिक, सुरक्षाबलों को दोनों जिलों में सशस्त्र समूहों के ठिकाने होने की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद संदिग्ध स्थानों पर तलाशी और अभियान शुरू किया गया।
खुफिया जानकारी के आधार पर चला अभियान
ISPR के बयान के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को बलूचिस्तान के कलात जिले के जट्टकाबाद और ग्वादर जिले की पसनी तहसील के शादी कौर इलाके में संदिग्ध आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी।
इसके बाद सुरक्षाबलों ने संबंधित क्षेत्रों में अलग-अलग अभियान चलाने का निर्णय लिया।
सेना का कहना है कि इन इलाकों में सशस्त्र समूहों के कई ठिकाने होने की जानकारी मिली थी। स्थानीय आबादी की सुरक्षा और संदिग्ध ठिकानों को खत्म करने के उद्देश्य से अभियान शुरू किया गया।
हालांकि, इन अभियानों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मुख्य रूप से पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक बयान पर आधारित है।
कलात में मुठभेड़, चार आतंकवादी मारे गए
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, पहला खुफिया-आधारित अभियान 18 अक्टूबर को कलात जिले के जट्टकाबाद इलाके में चलाया गया।
इस दौरान सुरक्षा बलों ने संदिग्ध आतंकवादियों के ठिकाने को घेरने का प्रयास किया।
ISPR का दावा है कि अभियान के दौरान सुरक्षाबलों और हथियारबंद व्यक्तियों के बीच गोलीबारी हुई।
सेना ने जवाबी कार्रवाई में चार आतंकवादियों को मार गिराने की जानकारी दी है।
इसके अलावा घटनास्थल से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद करने का दावा किया गया है।
हालांकि, मारे गए व्यक्तियों की पहचान और संबंधित संगठन में उनकी भूमिका के बारे में स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ग्वादर में IED विस्फोट, मेजर की मौत
कलात में हुई कार्रवाई के अलावा ग्वादर जिले की पसनी तहसील के शादी कौर इलाके में भी सुरक्षाबलों ने अभियान चलाया।
ISPR के अनुसार, इस दौरान सुरक्षाबलों की एक टुकड़ी को विस्फोटक उपकरण के जरिए निशाना बनाया गया।
धमाके में पाकिस्तानी सेना के मेजर वजाहत वहीद की मौत हो गई।
सेना के मुताबिक, मेजर वजाहत वहीद अभियान के दौरान सुरक्षाबलों की टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे।
विस्फोट के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और अन्य संदिग्ध ठिकानों की तलाश जारी रखी गई।
सेना ने घटना को आतंकवादी हमला बताया है।
लाहौर के रहने वाले थे मेजर वजाहत वहीद
पाकिस्तानी सेना ने मारे गए अधिकारी की पहचान मेजर वजाहत वहीद के रूप में की है।
ISPR के अनुसार, वह लाहौर के निवासी थे और उनकी उम्र 34 वर्ष थी।
वह बलूचिस्तान में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान तैनात थे।
सेना के बयान में बताया गया कि वह तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे थे, तभी उनकी टुकड़ी विस्फोटक उपकरण की चपेट में आ गई।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मेजर की मौत पर शोक व्यक्त किया और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की सराहना की।
'फितना अल-हिंदुस्तान' संगठन का किया उल्लेख
ISPR ने अपने बयान में अभियान के दौरान निशाना बनाए गए संदिग्ध समूह को 'फितना अल-हिंदुस्तान' नाम से संबोधित किया है।
पाकिस्तानी प्रशासन इस शब्द का इस्तेमाल बलूचिस्तान में सक्रिय कुछ सशस्त्र समूहों के लिए करता है।
पाकिस्तानी सेना ने इन समूहों को भारत से समर्थन मिलने का आरोप भी लगाया है।
हालांकि, पाकिस्तानी सेना के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे इन अभियानों में मारे गए व्यक्तियों का भारत से संबंध स्थापित होता हो।
इसलिए भारत की कथित भूमिका को पाकिस्तानी सेना का आरोप ही माना जाना चाहिए, प्रमाणित तथ्य नहीं।
बलूचिस्तान में लंबे समय से सुरक्षा चुनौती
बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है। यह प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद लंबे समय से अलगाववादी हिंसा, राजनीतिक असंतोष और सुरक्षा अभियानों के कारण चर्चा में रहा है।
प्रांत के विभिन्न हिस्सों में सशस्त्र समूहों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं।
कुछ बलूच अलगाववादी संगठन प्रांत में अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करते हैं।
वहीं, पाकिस्तान सरकार ऐसे सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताती है।
इस संघर्ष ने स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा, विकास परियोजनाओं और सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है।
ग्वादर क्षेत्र की सुरक्षा का विशेष महत्व
बलूचिस्तान का ग्वादर जिला रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी सीपीईसी से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है।
इस क्षेत्र में बंदरगाह, परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
क्षेत्र में सशस्त्र हिंसा और सुरक्षा अभियानों का असर स्थानीय आबादी के साथ आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तानी सरकार लगातार ग्वादर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात करती रही है।
राष्ट्रपति जरदारी ने जताया शोक
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी बलूचिस्तान में हुई कार्रवाई को लेकर बयान जारी किया है।
उन्होंने मेजर वजाहत वहीद की मौत पर शोक व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई।
राष्ट्रपति ने आतंकवाद विरोधी अभियानों में सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।
उन्होंने विदेशी समर्थन से आतंकवाद फैलाने के पाकिस्तानी प्रशासन के आरोपों को भी दोहराया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
आतंकवाद विरोधी अभियान जारी रखने की घोषणा
ISPR ने बताया कि बलूचिस्तान के संबंधित इलाकों में तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सेना का कहना है कि किसी अन्य संदिग्ध सशस्त्र व्यक्ति की मौजूदगी मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पाकिस्तानी सेना ने इन अभियानों को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी रणनीति 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' का हिस्सा बताया है।
यह अभियान पाकिस्तान में सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
सुरक्षा बलों के सामने बढ़ती चुनौतियां
बलूचिस्तान और पाकिस्तान के अन्य अशांत क्षेत्रों में लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
खुफिया जानकारी के आधार पर होने वाले अभियानों के बावजूद सुरक्षा बलों पर हमलों की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकी हैं।
विस्फोटक उपकरणों का इस्तेमाल ऐसे अभियानों में तैनात जवानों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
इन परिस्थितियों में पाकिस्तानी प्रशासन को सुरक्षा कार्रवाई के साथ स्थानीय आबादी की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
मारे गए आतंकवादियों की पहचान स्पष्ट नहीं
पाकिस्तानी सेना ने चार आतंकवादियों के मारे जाने की पुष्टि अपने बयान में की है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत पहचान और आपराधिक गतिविधियों के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
इसके अलावा घटनास्थल से बरामद हथियारों की सटीक संख्या और प्रकार भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
मेजर की मौत और चार संदिग्ध आतंकवादियों के मारे जाने की घटनाएं अलग-अलग जिलों में हुई थीं।
फिलहाल दोनों अभियानों से जुड़ी जानकारी पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के बयानों पर आधारित है।