वॉशिंगटन: अमेरिका में तीन नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा हैं। इन चुनावों से तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहेगा या डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता के संतुलन को बदल देगी। मतदान से पहले उपलब्ध आकलनों में प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है, जबकि सीनेट का मुकाबला अनिश्चित बना हुआ है। हालांकि, चुनावी अनुमान अंतिम नतीजे नहीं हैं।
मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान नहीं होता। प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की निर्धारित सीटों पर चुनाव होते हैं। इसलिए इस चुनाव में ट्रंप की राष्ट्रपति की कुर्सी सीधे दांव पर नहीं है, लेकिन कांग्रेस में उनकी पार्टी की ताकत अगले दो वर्षों में उनके प्रशासन की काम करने की क्षमता पर असर डालेगी।
कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट के 30 अक्टूबर के आकलन ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बढ़ने के संकेत दिए हैं। संस्था ने प्रतिनिधि सभा की 12 सीटों की रेटिंग डेमोक्रेट्स के पक्ष में बदली है। उसका अनुमान है कि डेमोक्रेट्स 12 से 25 सीटें पलट सकते हैं और सदन में उनकी संख्या अधिकतम 240 तक पहुंच सकती है। यह संभावित परिणाम का आकलन है और वास्तविक सीट संख्या मतदान तथा मतगणना के बाद सामने आएगी। सीनेट में तस्वीर अधिक पेचीदा है। कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट ने सात प्रमुख मुकाबलों को ऐसा बताया है, जिनमें किसी भी पक्ष की जीत संभव है। इनमें अलास्का, आयोवा, कंसास, मेन, मिशिगन, ओहायो और टेक्सास शामिल हैं। दोनों दलों के पास बहुमत तक पहुंचने के रास्ते हैं। उसके अंतिम आकलन में डेमोक्रेट्स को मामूली बढ़त दी गई है, लेकिन करीबी मुकाबलों के कारण परिणाम को निश्चित नहीं माना जा सकता।
रिपब्लिकन पार्टी के लिए सीनेट में बराबरी की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि दोनों पक्ष 50-50 सीटों पर पहुंचते हैं तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का निर्णायक मत रिपब्लिकन पार्टी को नियंत्रण बनाए रखने में मदद करेगा। इसी वजह से डेमोक्रेट्स के लिए सीनेट में स्पष्ट बहुमत हासिल करना जरूरी है। यदि डेमोक्रेट्स केवल प्रतिनिधि सभा जीतते हैं तो ट्रंप प्रशासन की निगरानी और संसदीय जांच बढ़ सकती है। दोनों सदनों पर विपक्ष का नियंत्रण होने से नियुक्तियों और बजट पर भी प्रशासन की मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदन बचा लेती है तो ट्रंप इसे अपने एजेंडे के समर्थन के रूप में पेश कर सकेंगे। हालांकि, किसी भी स्थिति में अमेरिकी व्यवस्था की विधायी सीमाएं बनी रहेंगी। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी की हार तय बताना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध आकलन प्रतिनिधि सभा में उसके लिए कठिन मुकाबला और सीनेट में करीबी संघर्ष दिखाते हैं। ट्रंप की अपील कितनी प्रभावी रहती है और डेमोक्रेट्स अपनी संभावित बढ़त को सीटों में कितना बदल पाते हैं, इसका जवाब तीन नवंबर के मतदान से मिलेगा।