भारत की तिजोरी में बढ़ा सोना, RBI का बड़ा कदम

Update: 2026-07-07 14:16 GMT

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी रिजर्व मैनेजमेंट रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। हालात यह हैं कि देश का आधिकारिक स्वर्ण भंडार अब बढ़कर 115.8 अरब डॉलर (करीब 9.9 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह करीब 12 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक आर्थिक जोखिमों के कारण केंद्रीय बैंक पारंपरिक विदेशी मुद्राओं के साथ-साथ सोने को भी सुरक्षित संपत्ति के रूप में ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली रणनीति

विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार की रणनीति पर दोबारा विचार करना शुरू किया। युद्ध के बाद कई देशों ने डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करने के लिए सोने की खरीद बढ़ाई। इस बदलाव का असर दुनियाभर में देखने को मिला। यूरोप के कई देशों ने भी अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत किया। खासतौर पर पोलैंड ने सोने की खरीद में तेजी दिखाई और अपने भंडार में बड़ी बढ़ोतरी की।

पोलैंड और चीन ने भी बढ़ाया गोल्ड रिजर्व

पोलैंड ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने सोने के भंडार को बढ़ाना शुरू किया था। इसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उसने फिर से बड़े स्तर पर खरीदारी की। आंकड़ों के अनुसार, पोलैंड का गोल्ड रिजर्व 2023 की पहली तिमाही से 2026 की पहली तिमाही तक करीब 353 टन बढ़ा है। वहीं, चीन ने भी 2023 के बाद दोबारा सोने की खरीद शुरू की। चीन ने कुछ वर्षों तक अपने आधिकारिक स्वर्ण भंडार को स्थिर रखा था, लेकिन बदलते वैश्विक माहौल के बीच उसने फिर से गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की रणनीति अपनाई।

भारत का गोल्ड रिजर्व 880 टन के पार

भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। RBI ने पिछले एक दशक में लगातार अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाया है। वर्ष 2015 की पहली तिमाही में भारत के पास करीब 557.8 टन सोना था, जो 2026 की पहली तिमाही तक बढ़कर 880.5 टन हो गया। इस दौरान भारत के स्वर्ण भंडार में करीब 323 टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासतौर पर 2019 के बाद RBI ने सोने की खरीदारी की गति बढ़ाई है।

कई देशों ने बढ़ाया सोने का भंडार

भारत के अलावा तुर्की, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मिस्र और कतर जैसे देशों ने भी अपने गोल्ड रिजर्व में बड़ी बढ़ोतरी की है। तुर्की ने अपने भंडार को 2015 के करीब 116 टन से बढ़ाकर 2026 तक लगभग 535 टन कर लिया। इसी तरह कजाकिस्तान का स्वर्ण भंडार 198 टन से बढ़कर 354 टन और उज्बेकिस्तान का भंडार 275 टन से बढ़कर 416 टन तक पहुंच गया। हंगरी, सर्बिया और अन्य देशों ने भी अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत किया है।

सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

सोने की कीमतों में तेजी ने भी केंद्रीय बैंकों के भंडार का मूल्य बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 2024 की शुरुआत में सोने की कीमत करीब 2,000 डॉलर प्रति औंस थी, जो 2026 में बढ़कर 4,000 डॉलर प्रति औंस से ज्यादा हो गई। हालांकि अमेरिका, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के पास अभी भी दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण भंडार हैं, लेकिन उन्होंने हाल के वर्षों में नई खरीदारी की रफ्तार कम रखी है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, मुद्रा बाजार में अस्थिरता और आर्थिक जोखिमों के बीच RBI का सोने पर बढ़ता भरोसा भारत की आर्थिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सोने का बढ़ता भंडार देश को संकट के समय अतिरिक्त वित्तीय मजबूती प्रदान कर सकता है।

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