सोने के दाम में बड़ी गिरावट, ₹1.25 लाख के नीचे पहुंचा भाव

Update: 2026-07-17 11:38 GMT

नई दिल्ली। इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाले सोने और चांदी के भाव में अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। सोने की कीमतें जहां 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे पहुंच गई हैं, वहीं चांदी में भी दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, बुलियन मार्केट में आई इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर चिंता जैसे कई बड़े कारण हैं।

शुरुआती महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका की टैरिफ नीतियों को माना गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद शुरू हुए टैरिफ विवाद के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की खरीदारी बढ़ाई थी। इसके चलते सोने ने रिकॉर्ड स्तर छुआ था। हालांकि, बाद में बाजार में मुनाफावसूली और आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव के कारण कीमतों में गिरावट शुरू हो गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी दबाव देखा गया। कॉमेक्स बाजार में सोना करीब 3998 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1.24 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बराबर बैठता है। वहीं चांदी की कीमत करीब 55.695 डॉलर प्रति औंस रही, जो भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 1.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है।

घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। अगस्त डिलीवरी वाला सोना 302 रुपये की तेजी के साथ करीब 1,40,650 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा। वहीं चांदी में हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 2,15,885 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। पहला कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव है। आमतौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक संकट के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार बाजार की प्रतिक्रिया अलग रही है। निवेशकों ने युद्ध के प्रभावों को पहले ही कीमतों में शामिल कर लिया है।

दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी है। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हुई। बढ़ती महंगाई के कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं।

तीसरा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति है। महंगाई पर नियंत्रण के लिए फेड की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोने जैसे गैर-ब्याज वाले निवेशों पर दबाव बढ़ता है और कीमतों में गिरावट आ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में अंतर इसलिए दिखाई देता है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना आयात करता है। आयात शुल्क, जीएसटी, परिवहन खर्च, इंश्योरेंस और रुपये की कमजोरी जैसी वजहों से घरेलू बाजार में कीमतें अधिक रहती हैं।

आगे के बाजार पर विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी में फिलहाल नकारात्मक रुझान के साथ उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर है। इसके अलावा भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

तकनीकी स्तर पर सोने के लिए MCX पर 1,40,500 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सोना इस स्तर से ऊपर बना रहता है तो इसमें 1,45,500 रुपये तक तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, यह स्तर टूटने पर कीमतें 1,37,500 रुपये तक नीचे जा सकती हैं।

चांदी में भी 2,19,000 रुपये का स्तर अहम माना जा रहा है। इसके नीचे जाने पर कीमतें 2,14,000 से 2,10,000 रुपये तक फिसल सकती हैं। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चांदी में 1,98,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

कुल मिलाकर सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट कई वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक कारणों का परिणाम है। आने वाले समय में फेड की नीतियां, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय तनाव इन कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगे।

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