तेल-गैस में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, ₹84 हजार करोड़ का प्लान

Update: 2026-07-31 12:21 GMT

बिज़नेस: भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने समुद्री तेल और गैस खोज को बढ़ावा देने वाली 'समुद्र मंथन स्कीम' को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक कुल 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य देश में घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना है, ताकि आने वाले वर्षों में विदेशी आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना यानी समुद्र मंथन स्कीम को मंजूरी दी है। यह योजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत लागू की जाएगी। इसके जरिए समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज को तेज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि समुद्र की गहराइयों में मौजूद ऊर्जा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना में समुद्री तेल एवं गैस अन्वेषण से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया है। इसमें खोज, तकनीकी विकास, उत्पादन बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहन देने जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर रहा है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिसके कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। खासकर अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में तेल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।

हाल के वर्षों में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं को बढ़ाया है। इसी को देखते हुए सरकार घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। समुद्र मंथन योजना इसी रणनीति का हिस्सा है।

सरकार के अनुसार, इस योजना के माध्यम से समुद्री क्षेत्रों में 60 करोड़ टन से अधिक तेल और गैस के संभावित भंडार मिलने की उम्मीद है। इससे देश में तेल और गैस उत्पादन बढ़ सकता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

समुद्र मंथन योजना का एक बड़ा उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना भी है। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के जरिए निजी कंपनियों और वैश्विक ऊर्जा कंपनियों को भारत के समुद्री क्षेत्रों में अन्वेषण के लिए आकर्षित किया जा सकेगा। इससे नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा और तेल एवं गैस क्षेत्र में आधुनिक खोज प्रणाली विकसित होगी।

इस योजना से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है। समुद्री अन्वेषण, इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं, निर्माण और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई क्षेत्रों में रोजगार बढ़ सकता है। इसके अलावा देश में ऊर्जा से जुड़े उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उद्योगों, परिवहन और घरेलू जरूरतों के लिए लगातार बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए घरेलू संसाधनों का विकास जरूरी है।

समुद्र मंथन स्कीम के जरिए भारत न केवल तेल और गैस के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट के समय अपनी स्थिति को भी मजबूत बनाना चाहता है। ₹84,084 करोड़ के इस बड़े निवेश से देश की ऊर्जा नीति को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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