नई दिल्ली। छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को पूंजी बाजार से जोड़ने और उनके लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। SEBI SMEs के लिए एक विशेष समर्पित पोर्टल लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जहां छोटे उद्योगों को पूंजी बाजार से जुड़ी जानकारी, नियमों और अनुपालन से संबंधित स्पष्ट मार्गदर्शन मिल सकेगा।
इस पहल की जानकारी SEBI के मुख्य महाप्रबंधक राजेश कुमार डांगेती ने SME फंडरेजिंग कॉन्क्लेव के दौरान दी। यह कार्यक्रम भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (ICSI), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (AIBI) के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य SMEs को IPO के माध्यम से पूंजी जुटाने की प्रक्रिया, आवश्यक तैयारियों और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के बारे में जागरूक करना था।
SEBI अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित SME पोर्टल पर जारीकर्ताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और अनुपालन संबंधी दिशा-निर्देश उपलब्ध होंगे। इससे छोटे कारोबारियों को शेयर बाजार में लिस्टिंग की प्रक्रिया को समझने और नियमों का पालन करने में आसानी होगी। वर्तमान में कई SMEs को IPO लाने से पहले नियमों, दस्तावेजों और अनुपालन की जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। नया पोर्टल इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
इसके अलावा SEBI अपने लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) फ्रेमवर्क की भी समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना है, ताकि छोटे उद्योगों पर अनावश्यक बोझ कम हो सके। हालांकि, SEBI ने साफ किया है कि निवेशकों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
कॉन्क्लेव में SME कंपनियों को IPO के लिए तैयार करने को लेकर विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी कंपनी के लिए IPO सिर्फ पूंजी जुटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कंपनी की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को भी दर्शाता है। इसलिए IPO से पहले कंपनियों को मजबूत वित्तीय व्यवस्था, बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि SME कंपनियों को IPO लाने से पहले ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया को गंभीरता से लेना चाहिए। कंपनी के वित्तीय दस्तावेज, टैक्स रिकॉर्ड, कानूनी अनुपालन और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली मजबूत होना जरूरी है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और कंपनी को बाजार में बेहतर पहचान मिलती है।
नोएडा में 30 जुलाई और गुरुग्राम के मानेसर में 31 जुलाई 2026 को आयोजित इन कार्यक्रमों में NSE की वाइस प्रेसिडेंट पार्वती मूर्ति और AIBI के CEO डॉ. मिलिंद दलवी ने उद्यमियों को IPO प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही योजना, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी कार्यप्रणाली के जरिए SMEs पूंजी बाजार से बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं।
ICSI ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य नियामकों, बाजार मध्यस्थों और छोटे उद्यमियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है। संस्थान का मानना है कि मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन से देश में समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
ICSI देश में कंपनी सचिवों की एक प्रमुख संस्था है, जिसके पास 80 हजार से अधिक सदस्य और करीब 2.5 लाख छात्र जुड़े हुए हैं। संस्था लगातार कंपनियों को बेहतर प्रबंधन, अनुपालन और पारदर्शिता के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है।
SMEs भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं और रोजगार सृजन में उनकी बड़ी भूमिका है। ऐसे में SEBI का नया SME पोर्टल छोटे कारोबारियों के लिए पूंजी जुटाने के नए रास्ते खोल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ज्यादा संख्या में SME कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए प्रेरित होंगी और देश के आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है।