नई दिल्ली। भारत के विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित जेसीबी मशीन की पहली खेप न्यूजीलैंड भेजने के लिए हरी झंडी दिखाई। यह कदम भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के 20 अक्टूबर से लागू होने से ठीक एक दिन पहले उठाया गया है। इस पहल को भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।समझौते के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे निर्माण उपकरण, इंजीनियरिंग मशीनरी और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पुणे में बनी JCB मशीन न्यूजीलैंड के लिए रवाना
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जेसीबी मशीन के निर्यात की जानकारी साझा की।उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में अब भारत में बनी जेसीबी मशीनों की मदद से निर्माण कार्य किए जाएंगे। गोयल ने पुणे में निर्मित मशीन के पहले निर्यात को हरी झंडी दिखाने पर प्रसन्नता व्यक्त की।यह खेप एक मिनी एक्सकेवेटर की है, जिसका इस्तेमाल निर्माण और खुदाई संबंधी कार्यों में किया जाता है। इस निर्यात से भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग को न्यूजीलैंड जैसे विकसित बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
20 अक्टूबर से लागू होगा मुक्त व्यापार समझौता
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। आवश्यक कानूनी और अनुमोदन संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे लागू करने की तारीख तय की गई।इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड निर्यात किए जाने वाले सभी पात्र उत्पादों को पहले दिन से शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा।कपड़ा, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद और कृषि प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को इससे नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
JCB इंडिया का निर्यात 20 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद
जेसीबी इंडिया ने वर्ष 2026 में अपने कुल मशीनरी निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद जताई है।कंपनी के अनुमान के अनुसार, इस वर्ष करीब 18,000 मशीनों का निर्यात हो सकता है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 15,000 यूनिट था।यदि कंपनी अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल करती है, तो यह उसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।निर्माण उपकरणों की वैश्विक मांग और नए बाजारों तक पहुंच कंपनी की निर्यात योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को मिलेगा लाभ
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता भारतीय विनिर्माण उद्योग के लिए नए अवसर खोल रहा है।भारत में निर्मित मशीनों के निर्यात से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ औद्योगिक आपूर्ति शृंखला को भी लाभ हो सकता है।निर्माण उपकरण उद्योग से इस्पात, ऑटो कंपोनेंट्स, हाइड्रोलिक सिस्टम और इंजीनियरिंग क्षेत्र की कई कंपनियां जुड़ी होती हैं। ऐसे में मशीनरी निर्यात बढ़ने से इनसे संबंधित उद्योगों के लिए भी नए व्यावसायिक अवसर विकसित हो सकते हैं।
2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक आपसी वस्तु एवं सेवा व्यापार को लगभग दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षा व्यक्त की गई है।मुक्त व्यापार समझौते में निवेश, तकनीक, सेवाओं और कारोबारी सहयोग को भी महत्व दिया गया है। न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भी इस समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
छोटे उद्योगों और रोजगार के लिए नए अवसर
भारत से इंजीनियरिंग मशीनरी का निर्यात बढ़ने पर घरेलू आपूर्तिकर्ताओं और छोटे उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।निर्माण उपकरण बनाने वाली बड़ी कंपनियां अनेक छोटे एवं मध्यम उद्यमों से उपकरण और कलपुर्जे खरीदती हैं। इसलिए निर्यात आदेश बढ़ने पर इन कंपनियों की उत्पादन गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है।हालांकि, रोजगार और उत्पादन में वास्तविक वृद्धि भविष्य में मिलने वाले निर्यात आदेशों तथा बाजार की मांग पर निर्भर करेगी।
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार संबंधों में नया अध्याय
पुणे में निर्मित जेसीबी मशीन का न्यूजीलैंड के लिए पहला निर्यात भारत की औद्योगिक क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर है।मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय कंपनियों को नए बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच निवेश और तकनीकी सहयोग भी बढ़ सकता है।पीयूष गोयल के अनुसार, भारत-न्यूजीलैंड समझौता केवल शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना भी है।