पेमेंट दिग्गज VISA का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को झटका

Update: 2026-07-31 09:30 GMT

बिज़नेस: दुनिया की बड़ी पेमेंट कंपनियों में शामिल वीजा (VISA) ने अपने कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। कंपनी अपने वैश्विक कार्यबल में करीब 7 प्रतिशत की कटौती करने जा रही है। इस फैसले के तहत लगभग 2600 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होने की संभावना है। कंपनी ने यह कदम लागत कम करने, कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने और बदलते तकनीकी माहौल के अनुरूप खुद को तैयार करने के लिए उठाया है।

वीजा दुनिया की प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनियों में से एक है, जो क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सेवाओं के लिए जानी जाती है। कंपनी के इस फैसले के बाद दुनियाभर में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल है। खासतौर पर उन कर्मचारियों में असमंजस बढ़ गया है, जिन्हें छंटनी का सामना करना पड़ सकता है।

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, वीजा लगातार अपने काम करने के तरीकों में बदलाव कर रही है ताकि भविष्य के विकास के अवसरों का फायदा उठाया जा सके। वीजा के सीईओ रयान मैकइनर्नी ने कर्मचारियों को भेजे गए एक संदेश में कहा कि कंपनी को तेजी से बदलते पेमेंट सेक्टर और तकनीकी बदलावों के साथ कदम मिलाकर चलना होगा। इसके लिए संगठन को अधिक कुशल और प्रभावी बनाना जरूरी है।

छंटनी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती भूमिका को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। कंपनी में एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे कई दोहराव वाले कामों को कम किया जा रहा है। इससे कुछ प्रक्रियाएं तेजी से पूरी हो रही हैं और उत्पाद विकास में भी तेजी आई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल AI को ही छंटनी की वजह मानना सही नहीं होगा। कंपनियां अक्सर आर्थिक दबाव, खर्चों में कमी और संगठनात्मक बदलावों के कारण भी कर्मचारियों की संख्या घटाती हैं।

सोशल मीडिया पर भी वीजा की छंटनी को लेकर कई कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। वीजा के पूर्व कर्मचारी अर्णब दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पुरानी टीम की छंटनी को लेकर हैरानी जताई। उन्होंने बताया कि उनकी पूरी टीम को हटा दिया गया, जिसमें उनके मैनेजर भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उनके मैनेजर को लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए सराहना मिलती रही थी और उन्हें कंपनी के महत्वपूर्ण कर्मचारियों में गिना जाता था।

अर्णब की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कॉरपोरेट छंटनी को लेकर बहस शुरू हो गई। कई लोगों का कहना था कि बड़े स्तर पर होने वाली छंटनी का संबंध हमेशा कर्मचारियों के प्रदर्शन से नहीं होता। कंपनियां कई बार लागत कम करने के लिए ऐसे पदों को भी खत्म कर देती हैं, जिनकी जरूरत कम महसूस होती है या जिन पर खर्च ज्यादा होता है।

वीजा की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में कंपनी के पास लगभग 34,100 कर्मचारी थे। पिछले साल की तुलना में कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब कंपनी अपने खर्चों को नियंत्रित करने और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से कार्यबल में कमी कर रही है।

जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी और वित्तीय कंपनियां तेजी से ऑटोमेशन और एआई को अपना रही हैं। इसके चलते कई पारंपरिक नौकरियों पर असर पड़ रहा है। वीजा का यह फैसला भी इसी बड़े बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि कंपनी का कहना है कि यह कदम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है और इससे कंपनी को तेजी से बदलते डिजिटल पेमेंट बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। वहीं कर्मचारियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कई बड़ी कंपनियां लागत नियंत्रण के नाम पर लगातार छंटनी कर रही हैं।

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