नई दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। गृह मंत्रालय (MHA) भारतीय सेना के सहयोग से देश में नागरिक सुरक्षा यानी सिविल डिफेंस नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इस पहल के तहत पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 600 नागरिक सुरक्षा मास्टर ट्रेनर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आपदा, सुरक्षा संबंधी खतरों और अन्य आपातकालीन स्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को साझा की गई जानकारी के अनुसार, चयनित मास्टर ट्रेनर्स को भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण का प्रशिक्षण नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगी पहल
केंद्र सरकार की इस योजना के पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से 50 नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा।इस तरह कुल 600 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देने की योजना तैयार की गई है। इन प्रशिक्षकों को आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया देने, विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तैयार किया जाएगा।मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रशिक्षित होने के बाद वे अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य स्वयंसेवकों और संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षण देने में सहयोग कर सकेंगे।
भारतीय सेना के प्रशिक्षण केंद्रों पर होगी विशेष ट्रेनिंग
योजना के अनुसार, भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इस पहल का प्रमुख उद्देश्य सेना के अनुभव और नागरिक सुरक्षा संगठनों की स्थानीय पहुंच को एक साथ जोड़ना है।विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को संकट की परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने और संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल विकसित करने में मदद मिलेगी।इसके अलावा प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षकों का समूह तैयार करना है, जो अपने क्षेत्रों में आपातकालीन तैयारी से संबंधित जानकारी और कौशल को आगे बढ़ा सकें।
उभरते खतरों से निपटने की तैयारी
वर्तमान समय में नागरिक सुरक्षा की चुनौतियां केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित नहीं हैं। ड्रोन से जुड़े खतरे, साइबर हमले, हवाई हमलों की आशंका और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी चिंता के विषय हैं।इसी दिशा में भारतीय सेना ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 'ट्रेन विद योर आर्मी' पहल के तहत तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था17 से 19 अक्टूबर तक चले इस शिविर में 50 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के 16 कर्मचारी और नागरिक सुरक्षा संगठन के 34 स्वयंसेवक शामिल थे।इस दौरान ड्रोन खतरों, हवाई हमलों, साइबर सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव तकनीकों से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया।
महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर
गृह मंत्रालय की इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य देश के आवश्यक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है।बिजली आपूर्ति, परिवहन नेटवर्क, संचार सुविधाएं, अस्पताल और अन्य आवश्यक सेवाएं आपातकालीन परिस्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।किसी बड़ी आपदा या सुरक्षा संबंधी संकट के दौरान इन सेवाओं के बाधित होने से आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।ऐसे में नागरिक सुरक्षा संगठनों और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करना जरूरी माना जाता है।
नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की भूमिका होगी मजबूत
नागरिक सुरक्षा संगठन आपातकालीन परिस्थितियों में स्थानीय प्रशासन की सहायता करते हैं। इनके स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्यों, जनजागरूकता कार्यक्रमों तथा आपदा प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में सहयोग देते हैं।गृह मंत्रालय के अंतर्गत नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण की व्यवस्था स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहले से मौजूद है। नागपुर स्थित राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा महाविद्यालय विशेष और मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण का प्रमुख संस्थान है।भारतीय सेना के साथ प्रस्तावित प्रशिक्षण पहल से इस व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नवंबर के दूसरे सप्ताह तक प्रशिक्षण का लक्ष्य
गृह मंत्रालय की योजना के मुताबिक, पहले चरण के सभी 600 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरा किया जाना है।इस पहल के माध्यम से देश में ऐसा प्रशिक्षित नेटवर्क विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो संकट की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की प्रभावी सहायता कर सके।नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सेना और गृह मंत्रालय का यह संयुक्त प्रयास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आपातकालीन तैयारियों, एजेंसियों के बीच समन्वय और नागरिकों की सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिलने की संभावना है।