नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लंबे समय तक सत्ता में बने रहने संबंधी बयान को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गृह मंत्री के दावे को 'बेबुनियाद आत्मविश्वास' करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल चुनावी प्रक्रिया को अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
अमित शाह के बयान पर कांग्रेस का पलटवार
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अमित शाह जिस तरह भविष्य में सत्ता में बने रहने का भरोसा जता रहे हैं, उसका कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा नेताओं को चुनाव परिणामों को लेकर इतना आत्मविश्वास कैसे हो सकता है।वेणुगोपाल ने कहा, "यह बेबुनियाद आत्मविश्वास है। आखिर यह किस तरह का आत्मविश्वास है? क्या उन्हें लगता है कि ज्ञानेश कुमार या भविष्य का कोई मुख्य चुनाव आयुक्त उन्हें ऐसा करने में मदद करेगा? यह एक बेबुनियाद दावा है। ऐसा होने वाला नहीं है। हम ऐसा नहीं होने देंगे, और भारत भी ऐसा बिल्कुल नहीं होने देगा।"कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सत्ता का फैसला जनता करती है और कोई भी राजनीतिक दल पहले से यह तय नहीं कर सकता कि वह कितने वर्षों तक सरकार में बना रहेगा।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव अधिकारियों का दुरुपयोग कर रही है। हालांकि, ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं और इनसे किसी चुनावी गड़बड़ी का स्वतः प्रमाण नहीं मिलता।कांग्रेस लगातार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की है।
अमित शाह ने कांग्रेस के भविष्य पर किया था दावा
इस विवाद की पृष्ठभूमि में अमित शाह का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के लंबे समय तक केंद्र की सत्ता से बाहर रहने की संभावना जताई थी। शाह ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर चुनावी हार के बाद निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।गृह मंत्री ने विपक्ष के 'वोट चोरी' संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कांग्रेस अपनी चुनावी कमजोरियों को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग और मतदाता सूची की प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहरा रही है।शाह ने राहुल गांधी की राजनीति की आलोचना करते हुए दावा किया था कि कांग्रेस अगले 30 वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने
देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है।कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि विपक्ष अपनी चुनावी असफलताओं को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है।चुनाव आयोग पहले भी अपने निर्णयों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताते हुए निष्पक्षता पर उठे सवालों का जवाब दे चुका है।
लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों पर जोर
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी। उनके अनुसार, किसी भी सरकार की वैधता जनता के जनादेश पर निर्भर करती है और चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है।उन्होंने अमित शाह के राजनीतिक दावे को चुनौती देते हुए कहा कि देश की जनता किसी भी दल को स्थायी रूप से सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं देती।फिलहाल अमित शाह और केसी वेणुगोपाल के बयानों ने चुनाव आयोग की भूमिका, विपक्ष के आरोपों और आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।