नई दिल्ली: वेदांत सोसाइटी ऑफ न्यूयॉर्क के प्रमुख स्वामी सर्वप्रियानंद ने गुरुवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसान के खुद के बारे में पारंपरिक नजरिए के लिए चौथी बड़ी चुनौती हो सकती है। तेजी से विकसित होती मशीनों के इस दौर में, यह लोगों को फिर से सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर इंसानों को क्या चीज खास बनाती है।
NDTV वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए, न्यूयॉर्क स्थित इस संन्यासी और वेदांत विद्वान ने हाल ही में AI कंपनी 'एन्थ्रोपिक' (Anthropic) के शोधकर्ताओं के साथ चेतना (consciousness) से जुड़े सवालों पर चर्चा की। उन्होंने इस बात पर भी विचार रखा कि क्या उन्नत AI सिस्टम को एक 'व्यक्ति' (person) के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसका जवाब 'हां' और 'नहीं' दोनों है। उन्होंने कहा, "AI को एक व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए," लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि इसका मतलब यह नहीं है कि इस तकनीक में इंसानों जैसी आध्यात्मिक जागरूकता या चेतना है।
उन्होंने तर्क दिया कि AI ऐसे सवाल खड़े कर रहा है जो तकनीक से कहीं आगे जाकर चेतना, पहचान और मानवीय उद्देश्य की प्रकृति तक पहुंचते हैं।
मनोविश्लेषक सिगमंड फ्रायड के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान ने बार-बार इंसान के खुद को केंद्र में मानने और श्रेष्ठ समझने के भाव को चुनौती दी है।
इस संन्यासी के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसी ही चौथी बड़ी हलचल (disruption) हो सकती है।
उन्होंने कहा, "हम सोचते थे कि केवल हम ही रचनात्मक बुद्धि (creative intelligence) वाले हैं। अब हम देख रहे हैं कि AI वह सब कर सकता है जो सबसे बेहतरीन इंसानी दिमाग कर सकता है, और वह भी बेहतर तरीके से।"
उन्होंने तर्क दिया कि यह विकास इंसान को एक ऐसे नाजुक मोड़ पर ले आया है, जहां लोगों को फिर से सोचना होगा कि आखिर इंसानों को लगातार सक्षम होती जा रही मशीनों से क्या अलग करता है।
उन्होंने कहा, "हमें खुद से पूछना होगा कि वह क्या है जो हमें अलग बनाता है, हमें खास बनाता है, और हमें अपनी ऊर्जा कहां लगानी चाहिए।"
उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे-जैसे AI सिस्टम और अधिक उन्नत और इंटरैक्टिव होते जाएंगे, समाज उनके साथ व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ने लग सकता है—भले ही चेतना से जुड़े बुनियादी सवाल अनसुलझे ही क्यों न रहें।
चर्चा के दौरान, उन्होंने 'एन्थ्रोपिक' के शोधकर्ताओं के साथ हुई अपनी बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उद्योग में सफलता पाने के बावजूद, उनमें से कई शोधकर्ता इस बात को लेकर बहुत चिंतित हैं कि वे जो तकनीक विकसित कर रहे हैं, उसके क्या परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि AI शोधकर्ताओं के बीच उन्नत मॉडलों द्वारा दिखाए जाने वाले अप्रत्याशित व्यवहार को समझने में रुचि बढ़ रही है।
उन्होंने 'पर्सोना ड्रिफ्ट' (persona drift) नामक एक स्थिति का जिक्र किया। इसमें होता यह है कि बातचीत के दौरान, जब कोई AI सिस्टम किसी खास भूमिका, पहचान या व्यवहार के ढांचे को अपनाता है, तो उसके जवाब देने के तरीके और सोचने के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।
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