New Delhi नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि नक्सलवाद के हर निशान को मिटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नक्सल-मुक्त भारत बनाने का मोदी सरकार का संकल्प पूरा हो गया है। अब समय आ गया है कि नक्सलवाद के कारण देश को मिले घावों को भरा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हर पीड़ित सम्मान के साथ अपना जीवन जी सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस तरह नक्सलवाद का खात्मा किया गया है, उसी तरह इसके बचे-खुचे निशानों को भी पूरी तरह मिटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर को एक बार फिर से एक जीवंत और समृद्ध क्षेत्र बनना चाहिए। इस दिशा में पहले ही काफी काम हो चुका है, जिसमें क्षेत्र के पारंपरिक आदिवासी नेतृत्व का बड़ा योगदान रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद से मिले पुराने घावों को भरने के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि बस्तर—जो कांग्रेस के शासनकाल में पांच दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहा था—वहां अब लोगों तक हर तरह की सुविधा पहुंच रही है।
शाह ने नक्सलियों की हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए IED विस्फोटों का इस्तेमाल किया, जिससे कई निर्दोष लोग अपंग हो गए। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों का इससे बड़ा उल्लंघन और कोई नहीं हो सकता। नक्सलवाद को खत्म करने के बाद सरकार की आगे की रणनीति पर बात करते हुए, गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि पूरे देश में सेवा से जुड़े कई अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने 'सेवा संकल्प अभियान' का जिक्र किया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन (राज्य के प्रमुख और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में) के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है।
बस्तर में आए बदलावों का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जो क्षेत्र कांग्रेस के शासन में पांच दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित था, वहां अब हर तरह की सुविधा पहुंच रही है। 'नियद नेल्लानार' (Niyad Nellanar) योजना के तहत लोगों तक बुनियादी ढांचा और सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने बस्तर को फिर से एक खुशहाल और जीवंत जगह बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। इसमें 'बस्तर ओलंपिक', 'बस्तर पांडुम', 'नियद नेल्लानार' और 'मुख्यमंत्री सामूहिक बस योजना' जैसी पहल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, राज्य समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (जयपुर), भारतीय जैन संगठन और कई अन्य संस्थाएं दिव्यांगों और पीड़ितों की मदद करने के इस नेक काम में अपना योगदान दे रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि दिव्यांगों को व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, बैसाखी, सुनने की मशीन (हियरिंग एड), स्मार्ट वॉकिंग स्टिक, कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर, सरकार बस्तर में उम्मीद और खुशहाली का एक नया दौर लाने में मदद कर सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री ने दोहराया कि मोदी सरकार हर दिव्यांग और पीड़ित के पुनर्वास के अवसर सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और इन प्रयासों में केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।
Tags: