नई दिल्ली। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और विश्वसनीयता को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। अन्नामलाई ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की लगातार हिरासत पर चिंता जताई।
राहुल गांधी को सवाल उठाने का अधिकार
अन्नामलाई ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक नेता को सरकार तथा संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाने का अधिकार है।उन्होंने राहुल गांधी द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते समय लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता का ध्यान रखना जरूरी है।अन्नामलाई ने कहा कि किसी प्रक्रिया में खामियां दिखाई देती हैं, तो उन्हें उचित मंच पर उठाया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और सवालों के लिए जगह होना आवश्यक है।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
अन्नामलाई ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की गिरफ्तारी तथा हिरासत को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना की।उन्होंने कहा कि CJP के विरोध प्रदर्शन के तौर-तरीकों से वह पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन संगठन जिन मुद्दों पर सवाल उठा रहा है, उन पर चर्चा होनी चाहिए।अन्नामलाई ने कहा कि किसी संगठन के प्रदर्शन करने के तरीके से असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उसके सवालों को नजरअंदाज कर दिया जाए।उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार हिरासत में रखने से इन नेताओं का आंदोलन कमजोर होने के बजाय और मजबूत हो सकता है।
जमानत प्रक्रिया में परेशान करने का आरोप
पूर्व भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि CJP नेताओं और उनके वकीलों को जमानत की कार्यवाही के दौरान बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ा।उन्होंने कहा कि कानून का शासन बनाए रखना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रियाओं का निष्पक्ष पालन होना चाहिए।CJP ने भी आरोप लगाया है कि उसके नेताओं की हिरासत बढ़ाने और जमानत संबंधी कार्यवाही में प्रक्रियागत खामियां रही हैं।संगठन ने सौरव दास और आशुतोष रंका की हिरासत को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी का दावा है कि उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।हालांकि, पुलिस ने अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है।
SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रही CJP
कॉकरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है।संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग उठाई है।दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान CJP के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधात्मक आदेशों और पूर्व में दिए गए कानूनी आश्वासनों का उल्लंघन किया।वहीं, CJP का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।चुनाव आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार करता रहा है।
परिसीमन के मुद्दे पर भी जताई चिंता
अन्नामलाई ने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार से पारदर्शिता बरतने की अपील की।उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।उनके अनुसार, जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए।उन्होंने सरकार से सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर निष्पक्ष परिसीमन फार्मूला तैयार करने का आग्रह किया।अन्नामलाई ने यह भी कहा कि प्रतिनिधित्व में 50 प्रतिशत वृद्धि का आश्वासन प्रस्तावित विधेयक में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर जोर
अन्नामलाई के बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने एक ओर राहुल गांधी के सवाल उठाने के अधिकार को स्वीकार किया, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई।उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में कानून का सम्मान और सवाल पूछने की स्वतंत्रता दोनों आवश्यक हैं।उनके मुताबिक, विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को कानून का पालन करना चाहिए, जबकि प्रशासन को भी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।अन्नामलाई के बयान के बाद SIR प्रक्रिया, CJP नेताओं की हिरासत और पुलिस की भूमिका को लेकर चल रही बहस को नया संदर्भ मिला है।