नई दिल्ली,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय सेना को तत्काल और उभरती चुनौतियों के लिए तैयार रहते हुए एक दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण (इंटीग्रेटेड अप्रोच) बहुत महत्वपूर्ण है। 'आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस' में अपने संबोधन के दौरान, सिंह ने सेना के शीर्ष अधिकारियों से कहा कि वे चल रहे भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर कड़ी नज़र रखें और किसी भी संभावित चुनौती के लिए तैयार रहें। उन्होंने अगले 20-30 वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया और सेना के वरिष्ठ नेतृत्व से कहा कि वे तत्काल और उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान, सेना के शीर्ष कमांडरों ने चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सेना की युद्ध-तैयारी की व्यापक समीक्षा की। सिंह ने सेना की भविष्य की तैयारियों को मजबूत करने के लिए 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन' (थल युद्ध सिद्धांत) भी जारी किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रणनीतियां गतिशील और लचीली होनी चाहिए, ताकि बदलती परिस्थितियों के अनुसार उनमें समय रहते बदलाव किया जा सके।
बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने के लिए सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता में नवीन सोच, बेहतर तालमेल, बेहतरीन समन्वय और आधुनिक हथियारों की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा।
रक्षा मंत्री ने सेना के पुनर्गठन के प्रयासों की सराहना की, जिसमें ड्रोन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने, लगातार प्रदर्शन का आकलन करने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार जरूरी सुधार लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में प्रयासों को तेज करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि भले ही हवाई, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ रही हैं, फिर भी थल युद्ध और जमीनी सेना की अहमियत हमेशा बनी रहेगी।
उन्होंने आधुनिक युद्ध के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया और कहा कि सफलता 'मल्टी-डोमेन' क्षमताओं और संयुक्त अभियानों में बेहतरीन समन्वय पर निर्भर करेगी। रक्षा मंत्री ने सेना के आत्मनिर्भरता प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमताएं सभी संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा, "बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' को प्राथमिकता दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात भी अब तक के उच्चतम स्तर लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।"
'सुधारों का वर्ष - 2025' (Year of Reforms – 2025) का जिक्र करते हुए, सिंह ने कहा कि सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसकी सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने कमांडरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने कमांड और स्तरों पर इन सुधारों को आगे बढ़ाएं, और यह सुनिश्चित करें कि इनसे परिचालन क्षमताओं (operational capabilities) में ठोस लाभ मिलें। सिंह द्वारा जारी 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन' (थल युद्ध सिद्धांत) एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है, जो भारतीय सेना को युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करती है।
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