नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार, 24 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दी। मोइत्रा ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से संबंधित फैसलों को लेकर ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि ये आरोप मोइत्रा के हैं और शिकायत दिए जाने भर से आरोप साबित नहीं होते।

यह घटनाक्रम चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों के दौरान कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग ने कहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं और SIR समेत आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर भी ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद कुछ कदम उठाए। मोइत्रा ने यह भी दावा किया कि वास्तविक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने जैसी कार्रवाई आधिकारिक कर्तव्य के दायरे में नहीं आ सकती और ऐसे मामलों में कानूनी संरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता। ये उनके आरोप हैं; संबंधित मुद्दों पर कानूनी निष्कर्ष जांच या न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होंगे।

पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचीं महुआ

कृष्णानगर से लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा गुरुवार दोपहर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचीं। उन्होंने कहा कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ शिकायत देने आई हैं और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आई जानकारी की जांच होनी चाहिए।

मोइत्रा ने दावा किया कि चुनाव आयोग तीन सदस्यीय निकाय है और महत्वपूर्ण फैसलों में संस्थागत प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले लगभग 10 महीनों के दौरान अलग-अलग मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रस्तावों या कदमों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इस दावे की व्याख्या अलग तरह से की गई है। आयोग से जुड़े स्पष्टीकरण में कहा गया कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार सामने आना स्वाभाविक है और आयोग के अंतिम निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए।

मतदाता सूची को लेकर लगाए आरोप

मोइत्रा ने अपनी शिकायत से जुड़े बयान में मतदाता सूची और चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि तकनीकी व्यवस्था के केंद्रीकरण के कारण स्थानीय स्तर पर काम करने वाले निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की भूमिका प्रभावित हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े कुछ कामों में स्थानीय अधिकारियों को पर्याप्त नियंत्रण या पहुंच नहीं दी गई। मोइत्रा ने इसे मतदाता सूची में कथित हस्तक्षेप से जोड़ा। फिलहाल इन आरोपों को स्वतंत्र जांच में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

इस विवाद का बड़ा हिस्सा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग के भीतर उससे संबंधित निर्णयों को लेकर है। विपक्षी दलों ने हाल के दिनों में इन मुद्दों पर मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाने पर लिया है, जबकि चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों की प्रक्रिया का बचाव किया है।

फॉर्म-6 के बदलाव पर भी सवाल

महुआ मोइत्रा ने नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से जुड़े एक बदलाव को लेकर भी सवाल उठाया। उनका दावा है कि फॉर्म में SIR से जुड़ा अतिरिक्त सवाल शामिल करने पर अन्य चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी और कहा था कि ऐसा बदलाव निर्धारित नियमों के तहत किया जाना चाहिए।

मोइत्रा ने इस प्रक्रिया के मतदाताओं पर असर को लेकर भी व्यापक दावे किए हैं। हालांकि इन दावों के प्रभाव और संख्या को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित चुनावी रिकॉर्ड की आवश्यकता होगी।

चुनाव आयोग ने दिया स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई। आयोग के मुताबिक किसी संस्था के भीतर चर्चा के दौरान अधिकारियों के अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है।

आयोग का कहना है कि विचार-विमर्श के दौरान व्यक्त की गई राय को अंतिम निर्णय से अलग करके देखा जाना चाहिए। आयोग के स्पष्टीकरण के मुताबिक SIR सहित अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। इस तरह आयोग ने उन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अंतिम फैसले अकेले किए।

यही कारण है कि मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। विपक्षी नेता आंतरिक आपत्तियों से संबंधित रिपोर्ट को चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाने का आधार बता रहे हैं, जबकि आयोग इसे सामान्य आंतरिक विचार-विमर्श की प्रक्रिया के रूप में पेश कर रहा है।

विपक्ष ने तेज किया विरोध

ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद केवल महुआ मोइत्रा की शिकायत तक सीमित नहीं है। अन्य विपक्षी दलों ने भी मीडिया रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने 25 सितंबर को अपने प्रदेश और जिला संगठनों से चुनाव कार्यालयों तक विरोध मार्च आयोजित करने को कहा है।

विपक्ष के कुछ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग भी उठाई है। वहीं भाजपा और चुनाव आयोग से जुड़े पक्षों ने आरोपों को खारिज करते हुए आयोग की संस्थागत प्रक्रिया का बचाव किया है।

शिकायत पर आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक महुआ मोइत्रा ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है। शिकायत देना और एफआईआर दर्ज होना अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं; उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में पुलिस की आगे की कार्रवाई का पूरा विवरण सामने नहीं आया है।

अब यह देखा जाएगा कि पुलिस शिकायत पर क्या कदम उठाती है। महुआ मोइत्रा ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका की जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जबकि चुनाव आयोग ने निर्णय प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अंतिम फैसले सामूहिक और सर्वसम्मत थे।

इस पूरे विवाद में मोइत्रा तथा अन्य विपक्षी नेताओं के आरोप, चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण और पुलिस शिकायत तीन अलग पहलू हैं। आरोपों की कानूनी सत्यता किसी जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित हो सकती है।

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