नई दिल्ली : 1 नवंबर। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की रैली को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस रैली के माध्यम से देश की जनता ने केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और सत्ता में बने रहने के लिए अनुचित तरीके अपना रही है।कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों ने रैली के माध्यम से अपनी आवाज उठाई है। उनके अनुसार, यह विरोध केवल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जनता की चिंता को दर्शाता है।वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा, "भारत की जनता नरेंद्र मोदी और अमित शाह को यह संदेश देना चाहती है कि वे किस तरह देश के लोकतंत्र को बर्बाद कर रहे हैं। आज भारत के लोगों ने मोदी और अमित शाह को एक साफ संदेश दिया है: अब आपके दिन लद गए हैं। यह स्पष्ट संदेश बिल्कुल साफ तौर पर पहुंचा दिया गया है।"कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब इन मुद्दों को समझ रही है और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का समर्थन कर रही है। उनके मुताबिक, रैली में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर जनता के बीच चिंता मौजूद है।वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की रैली ने सरकार को राजनीतिक संदेश दिया है और आने वाले दिनों में भी लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की रैली का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने के कारण बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य दोहराई गई और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। आयोग के अनुसार, गलत तरीके से नाम हटाए जाने पर पात्र मतदाता दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता हुए शामिल
INDIA गठबंधन की रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने भाग लिया।रैली से पहले विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में मार्च भी निकाला। इस दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध दर्ज कराया गया।राहुल गांधी ने लोगों से इस प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। विपक्ष ने अपने अभियान को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' का नाम दिया है।
रैली में भीड़ को लेकर कांग्रेस का दावा
केसी वेणुगोपाल ने रैली से पहले दावा किया था कि करीब 10 लाख लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने इसे दिल्ली की सबसे बड़ी राजनीतिक रैलियों में से एक बनाने की बात कही थी।हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने रविवार को रैली में हजारों लोगों के शामिल होने की जानकारी दी है।इसलिए कांग्रेस की ओर से किए गए भीड़ संबंधी दावे और स्वतंत्र रिपोर्टों में दर्ज उपस्थिति को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों का किया विरोध
रैली को लेकर भाजपा ने भी विपक्ष पर पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस आंदोलन के माध्यम से अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण एक वैधानिक प्रक्रिया है और विपक्ष इसे राजनीतिक विवाद का विषय बना रहा है।दूसरी ओर, कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
आंदोलन जारी रखने के संकेत
केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।कांग्रेस महासचिव ने इससे पहले भी रैली को प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के लिए कड़ी चेतावनी बताया था। उन्होंने दावा किया था कि जनता के समर्थन वेणुगोपाल का 'अब आपके दिन लद गए हैं' वाला बयान इसी राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। फिलहाल विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है, जबकि सरकार और भाजपा इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं।आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष इस अभियान को किस तरह आगे बढ़ाता है और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर क्या नए घटनाक्रम सामने आते हैं।