नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक चालानों के निपटारे से जुड़े नए सिस्टम को लागू करने पर फिलहाल रोक लगा दी है। बुधवार को सरकार ने यह फैसला दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों की कोऑर्डिनेशन कमेटी की ओर से संशोधित व्यवस्था पर गंभीर आपत्तियां और सुझाव सामने आने के बाद लिया। सरकार का कहना है कि वकीलों की चिंताओं की जांच परिवहन विभाग करेगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि वकीलों की ओर से नए चालान सिस्टम से संबंधित कई मुद्दे उठाए गए हैं। सरकार इन चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को जांच के लिए परिवहन विभाग के पास भेजा जा रहा है।
परिवहन मंत्री के मुताबिक इस मुद्दे को उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के संज्ञान में भी लाया जाएगा। जब तक वकीलों की ओर से उठाए गए बिंदुओं की समीक्षा नहीं हो जाती तब तक नए सिस्टम को लागू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। सरकार के इस फैसले से फिलहाल पुरानी व्यवस्था जारी रहने का रास्ता साफ हुआ है।विवाद की जड़ केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 167 में किए गए संशोधन और उसके आधार पर ट्रैफिक चालान के निपटारे की नई व्यवस्था है। संशोधित व्यवस्था के मुताबिक चालान प्राप्त करने वाला व्यक्ति उसे स्वीकार कर भुगतान कर सकता है या 45 दिनों के भीतर निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संबंधित प्राधिकारी के सामने दस्तावेजों के साथ उसे चुनौती दे सकता है।
वकीलों की प्रमुख आपत्ति विवादित ट्रैफिक चालानों के निपटारे में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर है। दिल्ली की जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की कोऑर्डिनेशन कमेटी का कहना है कि चालान से जुड़े विवादों का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। कमेटी ने एसडीएम, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को ऐसी जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल उठाए हैं।नई व्यवस्था में एक और प्रावधान को लेकर वकीलों ने आपत्ति जताई है। यदि किसी व्यक्ति की चालान के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर की गई चुनौती खारिज हो जाती है और वह इसके बाद अदालत जाना चाहता है तो उसे जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि पहले जमा करनी होगी। वकीलों का तर्क है कि यह शर्त आम नागरिकों के लिए न्यायिक उपाय तक पहुंच को मुश्किल बना सकती है।
दिल्ली में जिला अदालतों के वकीलों ने इन बदलावों के विरोध में 21 सितंबर को न्यायिक कामकाज से दूरी भी बनाई थी। तीस हजारी, पटियाला हाउस, रोहिणी, द्वारका, साकेत सहित विभिन्न अदालत परिसरों में वकीलों ने विरोध जताया। कोऑर्डिनेशन कमेटी ने कहा था कि संशोधित व्यवस्था से चालान संबंधी मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेटों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।वकीलों का यह भी कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया सभी लोगों के लिए समान रूप से आसान नहीं होगी। खासकर ऐसे वाहन चालक जो ऑनलाइन प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं, उन्हें तय समय के भीतर चालान को चुनौती देने और दस्तावेज अपलोड करने में परेशानी हो सकती है। कोऑर्डिनेशन कमेटी ने इस व्यवस्था के व्यावहारिक प्रभाव पर भी पुनर्विचार की मांग की है।
दूसरी तरफ नई व्यवस्था के पीछे ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे का उद्देश्य भी बताया गया है। दिल्ली में अदालतों के सामने ट्रैफिक चालानों की लंबित संख्या बहुत अधिक है। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की अदालतों में चार करोड़ से ज्यादा ट्रैफिक चालान लंबित थे और रोजाना हजारों नए चालान जुड़ रहे थे। नई व्यवस्था को इस बोझ को कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा था।संशोधित प्रणाली में ई-चालान से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में व्यवस्थित रखने और शिकायतों के निपटारे के लिए निर्धारित अधिकारियों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ऑन-द-स्पॉट चालान के लिए फोटो रिकॉर्ड जैसी व्यवस्था भी जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से जोड़ी गई है।
हालांकि वकीलों का कहना है कि मामलों के तेजी से निपटारे की जरूरत अपनी जगह है, लेकिन इसके लिए न्यायिक अधिकारों और नागरिकों के अदालत जाने के अधिकार से समझौता नहीं होना चाहिए। उनका विरोध विशेष रूप से इस बात को लेकर है कि विवादित चालानों पर शुरुआती फैसला प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में देने से न्यायिक और कार्यकारी भूमिकाओं के बीच अंतर प्रभावित हो सकता है। यह वकीलों का पक्ष है और सरकार अब इन्हीं आपत्तियों की समीक्षा कर रही है।
कोऑर्डिनेशन कमेटी ने पहले भी दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी चिंताएं रखी थीं। वकीलों के मुताबिक अगस्त और सितंबर में इस मुद्दे को लेकर ज्ञापन दिए गए और बातचीत भी हुई। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों को चालान निपटारे से जुड़ी भूमिका दिए जाने की खबरों के बाद विरोध तेज हुआ।अब दिल्ली सरकार द्वारा नोटिफिकेशन के अमल को रोकने के बाद परिवहन विभाग वकीलों से मिले सुझावों का अध्ययन करेगा। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका, 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट की शर्त और डिजिटल माध्यम से चालान को चुनौती देने की प्रक्रिया जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।
सरकार की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समीक्षा पूरी होने में कितना समय लगेगा या संशोधित व्यवस्था में आगे क्या बदलाव किए जाएंगे। समीक्षा के बाद ही यह साफ होगा कि नया चालान सिस्टम उसी स्वरूप में लागू होगा, उसमें बदलाव किए जाएंगे या वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी।इस फैसले से दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से नए ट्रैफिक चालान सिस्टम को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल नए चरण में पहुंच गया है। सरकार ने तत्काल अमल के बजाय संबंधित पक्षों की आपत्तियों की समीक्षा का रास्ता चुना है। अब परिवहन विभाग की जांच और उसके बाद सरकार के अंतिम निर्णय पर वकीलों के साथ वाहन चालकों की भी नजर रहेगी।