तिरुपति। आंध्र प्रदेश में नगर निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और विपक्षी युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। तिरुपति में मेयर पद के उम्मीदवार के नामांकन को लेकर हुए विवाद के बाद YSRCP सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें और विधान परिषद सदस्य सिपाई सुब्रमण्यम को नामांकन केंद्र तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की। सांसद ने पुलिस पर निष्क्रिय रहने और विपक्षी उम्मीदवारों को सुरक्षा देने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
नामांकन दाखिल करने पहुंचे सांसद को रोकने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को तिरुपति नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई थी। इस दौरान YSRCP के मेयर पद के उम्मीदवार वासु यादव का नामांकन दाखिल कराने के लिए सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति और एमएलसी सिपाई सुब्रमण्यम नगर निगम कार्यालय के पास स्थित नामांकन केंद्र पहुंचे।गुरुमूर्ति ने आरोप लगाया कि इसी दौरान बड़ी संख्या में TDP कार्यकर्ता और नेता वहां पहुंच गए। उन्होंने कथित तौर पर दोनों जनप्रतिनिधियों को घेर लिया और नामांकन दाखिल करने के लिए आगे बढ़ने से रोक दिया।सांसद के मुताबिक, उन्हें वापस लौटने के लिए कहा गया और नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की गई।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सांसद ने उठाए सवाल
सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटनाक्रम को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन विपक्षी उम्मीदवारों और जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त सुरक्षा देने में नाकाम रहा।उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक सांसद और विधान परिषद सदस्य को नामांकन केंद्र तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, तो सामान्य उम्मीदवारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।गुरुमूर्ति का कहना है कि चुनाव के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।उन्होंने सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं पर डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए पुलिस की भूमिका की जांच की मांग की।
नामांकन पत्र छीनने का भी लगाया आरोप
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सांसद गुरुमूर्ति ने आरोप लगाया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनके हाथों से दस्तावेज छीनने की भी कोशिश की गई।इस घटना के बाद नामांकन केंद्र के आसपास तनाव बढ़ गया। दोनों दलों के समर्थकों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटनाक्रम को लेकर पुलिस की विस्तृत जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
तिरुपति के कई इलाकों में तनावपूर्ण माहौल
तिरुपति नगर निगम चुनाव के पहले दिन कई नामांकन केंद्रों पर राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच टकराव की खबरें सामने आईं।कोरलागुंटा, बैरागीपट्टेडा, सत्यनारायणपुरम, श्रीकृष्ण नगर और मारुति नगर जैसे इलाकों में TDP तथा YSRCP कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ।स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों के समर्थकों को अलग कर व्यवस्था बहाल करने का प्रयास किया।वहीं, TDP नेताओं ने भी YSRCP कार्यकर्ताओं पर उनके उम्मीदवारों के नामांकन में बाधा डालने और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। YSRCP ने इन आरोपों को खारिज किया है।
आंध्र प्रदेश के दूसरे इलाकों में भी हिंसक झड़पें
नगर निकाय चुनावों के नामांकन के पहले दिन आंध्र प्रदेश के अन्य इलाकों में भी हिंसक घटनाएं सामने आईं।पुंगनूर, रायचोटी और धर्मावरम में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ। कुछ स्थानों पर वाहनों में आग लगाने, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं भी दर्ज की गईं।रायचोटी में कई वाहनों को नुकसान पहुंचा, जबकि धर्मावरम में पथराव के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर सामने आई।इन घटनाओं के बाद चुनावी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पहले दिन 89 नामांकन दाखिल
विवाद और तनाव के बीच तिरुपति नगर निगम चुनाव के पहले दिन कुल 89 नामांकन दाखिल किए गए।इनमें मेयर पद के लिए एक और पार्षद पदों के लिए 88 नामांकन शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, YSRCP की ओर से सबसे अधिक 61 नामांकन दाखिल किए गए, जबकि TDP ने 10 और जनसेना पार्टी ने चार नामांकन दाखिल किए।
निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग तेज
सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति ने मांग की है कि स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सभी उम्मीदवारों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और किसी भी राजनीतिक दल को नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाए।इस बीच दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर चुनावी प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोप लगा रहे हैं।तिरुपति में हुए टकराव के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी उम्मीदवारों की सुरक्षित भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती है।
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