पाकिस्तान के करीब जा रहे मुइज्जू को नशीद की चेतावनी, बोले- भारत की सुरक्षा से समझौता पड़ा भारी
माले/नई दिल्ली। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की हालिया पाकिस्तान यात्रा को लेकर उनके अपने देश में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के अध्यक्ष मोहम्मद नशीद ने मुइज्जू की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के साथ सैन्य और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने से भारत की चिंताएं बढ़ सकती हैं। यदि भारत को यह महसूस हुआ कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हो रहा है, तो इसके मालदीव के लिए बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं। नशीद ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति मुइज्जू बिना पर्याप्त विचार किए मालदीव को भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों में उलझा रहे हैं। मुइज्जू की 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक हुई पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में 20 समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ था।
पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने मुइज्जू को दी कड़ी चेतावनी
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने 25 अक्टूबर को अद्दू सिटी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा की आलोचना की।
नशीद ने कहा कि छोटे देशों को क्षेत्रीय शक्तियों के बीच चल रहे विवादों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। विशेष रूप से मालदीव जैसे देश के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का हिस्सा बनना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुइज्जू ने पाकिस्तान का दौरा करते समय संभावित सुरक्षा परिणामों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
नशीद ने चेतावनी दी कि यदि भारत को मालदीव और पाकिस्तान के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकियों से अपनी सुरक्षा के लिए खतरा महसूस हुआ, तो इसका नकारात्मक असर मालदीव पर पड़ सकता है।
यह चेतावनी नशीद का राजनीतिक और रणनीतिक आकलन है, भारत की ओर से किसी कार्रवाई की घोषणा नहीं।
पाकिस्तान के साथ सैन्य समझौते पर सबसे ज्यादा विवाद
मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
इनमें व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन, साइबर सुरक्षा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
हालांकि, विपक्ष की सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग को लेकर है।
मोहम्मद नशीद का कहना है कि पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंध बढ़ाने से भारत को सुरक्षा संबंधी चिंताएं हो सकती हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी कहा कि मालदीव को प्रतिस्पर्धी देशों के विवादों में शामिल होने से बचना चाहिए।
नशीद के अनुसार, मालदीव की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना आवश्यक है।
11 साल बाद पाकिस्तान पहुंचे मालदीव के राष्ट्रपति
मोहम्मद मुइज्जू ने 20 से 22 अक्टूबर के बीच पाकिस्तान की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा की थी।
यह पिछले 11 वर्षों में किसी मालदीव के राष्ट्रपति की पहली पाकिस्तान यात्रा थी।
यात्रा पाकिस्तान और मालदीव के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण पर मुइज्जू इस्लामाबाद पहुंचे थे।
इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से भी मुलाकात की।
इन बैठकों में रक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
दोनों देशों के बीच हुए 20 समझौते
मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 20 समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।
इन समझौतों में आर्थिक विकास के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की भी योजना शामिल है।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा लगभग 1.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर अगले दो वर्षों में 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया।
स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
मालदीव सरकार ने इस यात्रा को पाकिस्तान के साथ संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया है।
हालांकि, समझौतों पर हस्ताक्षर होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी प्रस्तावित परियोजनाएं लागू हो चुकी हैं।
भारत ने कहा- घटनाक्रम पर हमारी करीबी नजर
मालदीव और पाकिस्तान के बीच हुए समझौतों पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है।
24 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और संबंधित घटनाक्रम पर नजर रख रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर भारत अपने हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगा।
हालांकि, भारत ने मालदीव के खिलाफ किसी विशेष कार्रवाई या प्रतिबंध की घोषणा नहीं की है।
भारत की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि नई दिल्ली हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाले सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों को महत्वपूर्ण मानती है।
मालदीव की भौगोलिक स्थिति के कारण वहां होने वाले रक्षा और समुद्री सुरक्षा समझौते भारत के रणनीतिक हितों से भी जुड़े होते हैं।
पूर्व विदेश मंत्री ने भी मुइज्जू की नीति पर उठाए सवाल
मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी राष्ट्रपति मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा की आलोचना की है।
शाहिद ने आरोप लगाया कि मुइज्जू एक बार फिर भारत-विरोधी राजनीति को बढ़ावा देने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने वर्ष 2023 के राष्ट्रपति चुनाव का उल्लेख किया, जब मुइज्जू ने मालदीव में विदेशी सैन्य मौजूदगी के मुद्दे को प्रमुखता दी थी।
शाहिद का कहना है कि भारत के साथ संबंधों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना मालदीव के दीर्घकालिक हितों के लिए उचित नहीं होगा।
हालांकि, मुइज्जू ने दोबारा भारत-विरोधी चुनावी अभियान शुरू करने का कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया है। यह विपक्ष की ओर से जताई गई आशंका है।
पूर्व रक्षा मंत्री ने भी जताई सुरक्षा संबंधी चिंता
मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया अहमद दीदी ने भी पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौतों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि मालदीव को पाकिस्तान सहित सभी देशों के साथ स्वतंत्र रूप से संबंध विकसित करने का अधिकार है।
लेकिन रक्षा और सुरक्षा से जुड़े समझौतों के व्यापक क्षेत्रीय प्रभावों का आकलन करना भी जरूरी है।
उनके अनुसार, किसी देश के साथ सैन्य सहयोग को दूसरे देश में रणनीतिक झुकाव के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि भारत-पाकिस्तान तनाव बढ़ने की स्थिति में मालदीव को अपने राजनयिक संबंधों, सुरक्षा साझेदारियों और रणनीतिक स्वतंत्रता पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
भारत और मालदीव के रिश्ते क्यों हैं महत्वपूर्ण?
भारत और मालदीव के बीच लंबे समय से आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा संबंध रहे हैं।
हिंद महासागर में स्थित मालदीव महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों के करीब है।
भारत ने मालदीव में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विकास परियोजनाओं में सहयोग किया है।
इसके अतिरिक्त समुद्री निगरानी, आपदा राहत और सुरक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग रहा है।
मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन और आयात पर निर्भर है। इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध उसके आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसी वजह से मालदीव के विपक्षी नेता पाकिस्तान के साथ बढ़ते सुरक्षा संबंधों के संभावित प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।
मुइज्जू सरकार ने बताया स्वतंत्र विदेश नीति का हिस्सा
राष्ट्रपति मुइज्जू की सरकार अपनी विदेश नीति को 'मालदीव फर्स्ट' के सिद्धांत पर आधारित बताती रही है।
सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक और राजनयिक संबंध मजबूत करना है।
पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी मुइज्जू ने आर्थिक विकास, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय ने यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
इस प्रकार विपक्ष की सुरक्षा संबंधी आशंकाओं और सरकार के आर्थिक तथा राजनयिक उद्देश्यों के बीच मतभेद सामने आया है।
भारत-पाकिस्तान विवाद में फंसने का खतरा
पूर्व राष्ट्रपति नशीद की चेतावनी के बाद मालदीव में विदेश नीति को लेकर बहस तेज हो गई है।
विपक्ष का तर्क है कि छोटे देशों को बड़ी क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव से बचना चाहिए।
विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा संबंधी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए मालदीव की रक्षा साझेदारियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर मुइज्जू सरकार पाकिस्तान के साथ संबंधों को व्यापार, विकास और सुरक्षा सहयोग के अवसर के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह होगा कि मालदीव पाकिस्तान के साथ नए समझौतों को लागू करते समय भारत के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में संतुलन कैसे बनाए रखता है।
फिलहाल भारत ने घटनाक्रम पर नजर रखने की बात कही है, जबकि मालदीव के विपक्ष ने राष्ट्रपति मुइज्जू से संभावित सुरक्षा और राजनयिक परिणामों पर पुनर्विचार करने की मांग की है।