देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा होगी मजबूत, CISF ने बदला ढांचा
नई दिल्ली। देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, रणनीतिक संस्थानों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को अधिक मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अपने प्रशासनिक और परिचालन ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद 1 नवंबर 2026 से नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत CISF अब पारंपरिक क्षेत्रीय मॉडल की जगह कार्यात्मक क्षेत्र मॉडल (Functional Sector Model) के आधार पर काम करेगा। नई व्यवस्था में बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों, इस्पात उद्योगों, पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों, बंदरगाहों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा उनके कार्यक्षेत्र और विशिष्ट जरूरतों के अनुसार संचालित की जाएगी।इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता बढ़ाना, निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और अलग-अलग उद्योगों से जुड़े संभावित खतरों से बेहतर तरीके से निपटना है। CISF के अनुसार, विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा चुनौतियां अलग-अलग होती हैं। इसलिए उनकी निगरानी भी संबंधित क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए।
11 में से 8 सेक्टरों का होगा पुनर्गठन
CISF के मौजूदा 11 पर्यवेक्षी सेक्टरों में से आठ को नए कार्यात्मक मॉडल के अनुसार पुनर्गठित किया गया है। पहले इन सेक्टरों का संचालन मुख्य रूप से भौगोलिक सीमाओं के आधार पर होता था। इसके कारण एक क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन अलग-अलग प्रकार के औद्योगिक और रणनीतिक प्रतिष्ठान आते थे।नई व्यवस्था में एक ही उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों को समान सुरक्षा कमान के अंतर्गत लाया जाएगा, भले ही वे देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हों।इससे सुरक्षा अधिकारियों को संबंधित उद्योग की कार्यप्रणाली, संभावित जोखिम और आपातकालीन परिस्थितियों की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे सुरक्षा संबंधी निर्णय अधिक प्रभावी होंगे और विभिन्न प्रतिष्ठानों के बीच समन्वय मजबूत होगा।
भिलाई बनेगा इस्पात उद्योग की सुरक्षा का प्रमुख केंद्र
पुनर्गठन के तहत छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित केंद्रीय सेक्टर को अब विशेष इस्पात सेक्टर के रूप में विकसित किया गया है। यह सेक्टर इस्पात उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेगा।इसी तरह झारखंड के रांची स्थित पूर्वी सेक्टर को कोयला सेक्टर बनाया गया है। नई दिल्ली स्थित उत्तरी सेक्टर को पावर-1 और कोलकाता स्थित उत्तर-पूर्वी सेक्टर-2 को पावर-2 के रूप में पुनर्गठित किया गया है।गुवाहाटी स्थित उत्तर-पूर्वी सेक्टर को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है।इसके अलावा नई दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सेक्टर को सरकारी भवनों, संग्रहालयों, स्मारकों और मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की सुरक्षा के लिए विशेष सेक्टर बनाया गया है।
बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए दो विशेष सेक्टर
देश की समुद्री व्यापार व्यवस्था और बंदरगाहों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए CISF ने दो विशेष सेक्टर बनाए हैं।मुंबई स्थित पश्चिमी सेक्टर को पश्चिमी तट बंदरगाह सेक्टर और चेन्नई स्थित दक्षिणी सेक्टर को पूर्वी तट बंदरगाह सेक्टर में परिवर्तित किया गया है।इन दोनों सेक्टरों का मुख्य उद्देश्य समुद्री व्यापार से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता बढ़ाना है।CISF को अंतरराष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा संहिता (ISPS Code) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इससे बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था में उसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
हवाई अड्डों और परमाणु प्रतिष्ठानों की व्यवस्था रहेगी यथावत
नई व्यवस्था के तहत सभी सेक्टरों में बदलाव नहीं किया गया है। हवाई अड्डों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए पहले से कार्यरत कुछ विशेष सेक्टर अपने मौजूदा स्वरूप में काम करते रहेंगे।नई दिल्ली स्थित एयरपोर्ट सेक्टर-1, बेंगलुरु स्थित एयरपोर्ट सेक्टर-2 और परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग से संबंधित बेंगलुरु सेक्टर में कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव नहीं किया गया है।CISF के अनुसार, इन क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों से कार्यात्मक मॉडल के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जा रही है। इस अनुभव से मिली जानकारी को ध्यान में रखते हुए अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसी मॉडल को अपनाने का फैसला किया गया है।
साइबर सुरक्षा और ड्रोन खतरों पर विशेष ध्यान
CISF का नया ढांचा केवल पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों तक सीमित नहीं रहेगा। आधुनिक तकनीक से उत्पन्न खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।बल साइबर हमलों, डिजिटल सुरक्षा खतरों और ड्रोन से होने वाले संभावित हमलों को देखते हुए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित कर रहा है।इसके लिए प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग कर साइबर सुरक्षा, ड्रोन निगरानी और एंटी-ड्रोन तकनीक से संबंधित क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है।CISF को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की हवाई सुरक्षा के लिए नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की उच्च सुरक्षा वाली जेलों में सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं।
2.70 लाख जवानों वाले बल की बढ़ेगी विशेषज्ञता
वर्ष 1969 में स्थापित CISF देश के प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल है। इसकी संख्या लगभग 2.70 लाख कर्मियों की है। यह बल हवाई अड्डों, बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों, इस्पात उद्योगों, परमाणु प्रतिष्ठानों, सरकारी भवनों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों को सुरक्षा प्रदान करता है।नई व्यवस्था में जवानों और अधिकारियों को संबंधित उद्योग की सुरक्षा जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर रहेगा।इससे सुरक्षा प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया मॉडल
CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन की मंजूरी और केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति के बाद इस पुनर्गठन को लागू करने का निर्णय लिया गया।अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था से संबंधित मंत्रालयों, विभागों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधन के साथ बेहतर तालमेल स्थापित होगा।साथ ही किसी विशेष उद्योग में सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों की निगरानी उपलब्ध होगी।हालांकि, इस पुनर्गठन से कितने कर्मचारियों का स्थानांतरण होगा और व्यवस्था को लागू करने में कितनी अतिरिक्त लागत आएगी, इसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।CISF का मानना है कि कार्यात्मक क्षेत्र मॉडल देश की महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। आने वाले समय में इस नई व्यवस्था की सफलता का आकलन सुरक्षा प्रबंधन, परिचालन समन्वय और संभावित खतरों से निपटने की क्षमता के आधार पर किया जा सकेगा।