तिरुवनंतपुरम में जुटेंगे पीएसी अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे उद्घाटन
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 3 नवंबर 2026 को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाले सार्वजनिक लेखा समिति (Public Accounts Committee-PAC) के अध्यक्षों के सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में संसद और विभिन्न राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की सार्वजनिक लेखा समितियों के अध्यक्षों के शामिल होने की उम्मीद है। सम्मेलन का उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता, सरकारी खर्चों की जवाबदेही और वित्तीय नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करना है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद और विधानमंडलों की समितियां सरकार के कामकाज पर निगरानी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें सार्वजनिक लेखा समिति का विशेष स्थान है। यह समिति सरकारी खर्चों और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच करती है। ऐसे में पीएसी अध्यक्षों का सम्मेलन देश की संसदीय व्यवस्था को मजबूत बनाने और वित्तीय जवाबदेही के मानकों को बेहतर करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
पीएसी की भूमिका और सम्मेलन का महत्व
सार्वजनिक लेखा समिति भारतीय संसद की प्रमुख वित्तीय समितियों में से एक है। इसका गठन वर्ष 1921 में किया गया था। इसका मुख्य दायित्व यह देखना है कि सरकार ने संसद से स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया है या नहीं। समिति भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की जांच करती है और सरकारी विभागों के खर्चों में सामने आने वाली अनियमितताओं, वित्तीय खामियों तथा अनावश्यक व्यय से जुड़े मामलों की समीक्षा करती है।पीएसी की व्यवस्था केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सार्वजनिक लेखा समितियां गठित की जाती हैं। ये समितियां संबंधित राज्य सरकारों के वित्तीय कामकाज और सरकारी योजनाओं पर खर्च की गई राशि की जांच करती हैं। इस सम्मेलन में संसद और राज्य विधानमंडलों की समितियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने तथा जांच की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की जा सकती है।
केसी वेणुगोपाल हैं संसद की पीएसी के अध्यक्ष
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वर्ष 2026-27 के लिए संसदीय समितियों का पुनर्गठन किया था। इसके तहत कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल को सार्वजनिक लेखा समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इस समिति में लोकसभा के 15 और राज्यसभा के अधिकतम सात सदस्य शामिल होते हैं। समिति का कार्यकाल 1 मई 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक निर्धारित है।पीएसी का काम सरकारी विभागों के बजट की जांच करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखना है कि सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं पर खर्च की गई राशि से निर्धारित उद्देश्य हासिल हुए या नहीं। यदि किसी मंत्रालय या विभाग के खर्च में गड़बड़ी अथवा नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो समिति संबंधित अधिकारियों से जवाब मांग सकती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें संसद के समक्ष रखती है।
सरकारी खर्च में पारदर्शिता पर रहेगा जोर
सरकारी योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन, ग्रामीण विकास, कृषि और सामाजिक कल्याण सहित अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी धनराशि खर्च करती हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि जनता के टैक्स से प्राप्त धन का इस्तेमाल सही तरीके से हो।पीएसी की जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि सरकारी विभागों ने आवंटित बजट का उपयोग किस प्रकार किया। इसके साथ ही यह भी सामने आता है कि किसी योजना के क्रियान्वयन में कहां कमियां रह गईं और किन प्रक्रियाओं में सुधार की जरूरत है। सम्मेलन में इस तरह की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न राज्यों के अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर मिल सकता है।
तकनीक और आधुनिक संसाधनों की बढ़ती जरूरत
बदलते समय के साथ सरकारी कामकाज और वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रिया भी तेजी से बदल रही है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, ई-टेंडरिंग और बड़ी विकास परियोजनाओं के विस्तार के कारण सरकारी खर्चों की निगरानी पहले से अधिक तकनीकी हो गई है। ऐसे में ऑडिट और जांच की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो गया है।पीएसी के अध्यक्षों के सम्मेलन में डिजिटल माध्यमों से वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा, ऑडिट रिपोर्टों के समयबद्ध निपटारे और सरकारी विभागों से जवाब प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि सम्मेलन का आधिकारिक विस्तृत एजेंडा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
संसद और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद
इस सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्र और राज्यों की समितियों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान भी है। अलग-अलग राज्यों में सार्वजनिक लेखा समितियां अपने स्तर पर सरकारी योजनाओं और खर्चों की जांच करती हैं। कई बार किसी राज्य में अपनाई गई अच्छी प्रक्रिया दूसरे राज्यों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले भी सार्वजनिक लेखा समितियों को अधिक प्रभावी बनाने, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में पीएसी के शताब्दी वर्ष से जुड़े सम्मेलन के दौरान समितियों के लिए साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और आम लोगों से सुझाव लेने की आवश्यकता पर भी बात कही थी।ऐसे में 3 नवंबर को तिरुवनंतपुरम में होने वाला सम्मेलन संसदीय जवाबदेही और वित्तीय निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न विधानमंडलों की सार्वजनिक लेखा समितियों के बीच सहयोग बढ़ाने और सरकारी धन के इस्तेमाल की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। ओम बिरला द्वारा सम्मेलन का उद्घाटन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा।