नई दिल्ली/जामनगर। भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण गतिविधियां सामने आई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी भारत यात्रा के दौरान गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशाल तेल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। यह दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग परिसरों में शामिल है। यात्रा के दौरान रुबियो ने भारत की तेल शोधन क्षमता की सराहना करते हुए उसे 'तेल रिफाइनिंग महाशक्ति' बताया। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ ऊर्जा सहयोग और दोनों देशों के बीच ऊर्जा खरीद बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब युद्ध, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावटों के कारण वैश्विक तेल बाजार लगातार बदल रहा है।

जामनगर रिफाइनरी का किया दौरा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज के तेल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का दौरा किया।

जामनगर स्थित यह परिसर अपनी विशाल उत्पादन क्षमता और आधुनिक रिफाइनिंग सुविधाओं के लिए जाना जाता है।

यहां कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है।

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में जामनगर रिफाइनरी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

रुबियो का यह दौरा भारत की रिफाइनिंग क्षमता में अमेरिका की रुचि को दर्शाता है।

हालांकि दौरे के दौरान किसी नए व्यावसायिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।

भारत को बताया तेल रिफाइनिंग महाशक्ति

जामनगर दौरे से पहले मंगलवार को मार्को रुबियो ने भारत की तेल शोधन क्षमता की प्रशंसा की थी।

उन्होंने भारत को 'तेल रिफाइनिंग महाशक्ति' बताया।

यह टिप्पणी भारत की उस औद्योगिक क्षमता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिसके जरिए देश विभिन्न स्रोतों से कच्चा तेल खरीदकर उसे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों में बदलता है।

भारत की रिफाइनिंग क्षमता घरेलू ईंधन की मांग पूरी करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों को पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराने में भी उपयोगी है।

रुबियो के बयान से ऊर्जा क्षेत्र में भारत की भूमिका को लेकर अमेरिकी रुचि सामने आती है।

वेनेजुएला के कच्चे तेल पर अमेरिका की नजर

मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला से अधिक कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचे और भारत की रिफाइनरियां उसके प्रसंस्करण में बड़ी भूमिका निभाएं।

उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ वेनेजुएला के कच्चे तेल की अधिक खरीद और रिफाइनिंग की संभावनाओं पर बातचीत करने की बात कही।

वेनेजुएला में भारी किस्म के कच्चे तेल का उत्पादन होता है। इसे संसाधित करने के लिए उन्नत रिफाइनिंग तकनीक की जरूरत पड़ती है।

जामनगर रिफाइनरी की तकनीकी क्षमता इसे ऐसे कच्चे तेल के प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त बनाती है।

मुकेश अंबानी से ऊर्जा सहयोग पर चर्चा

21 अक्टूबर को जामनगर पहुंचे रुबियो ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी से मुलाकात की।

इस दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार, पारंपरिक और नई ऊर्जा, विश्वसनीय आपूर्ति व्यवस्था तथा व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

रिलायंस के अनुसार, बातचीत में ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचे के बीच बढ़ते संबंधों, विशेष रूप से डेटा सेंटर जैसी सुविधाओं की ऊर्जा जरूरतों पर भी विचार किया गया।

रुबियो ने जामनगर के स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण परिसर का भी दौरा किया।

जयशंकर और रुबियो की बैठक में ऊर्जा व्यापार पर जोर

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच मुंबई में 20 अक्टूबर को बातचीत हुई।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।

अमेरिका भारत को कच्चा तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाना चाहता है।

भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए अलग-अलग देशों से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर तेल खरीदने की रणनीति अपनाता है।

ऐसे में दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार का विस्तार महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

रोजाना 14 लाख बैरल तेल संसाधित करने की क्षमता

रिलायंस के जामनगर परिसर में दो विशाल रिफाइनरियां संचालित होती हैं।

इनकी संयुक्त क्षमता प्रतिदिन लगभग 14 लाख बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने की है।

यह दुनिया का सबसे बड़ा एकल-स्थल तेल रिफाइनिंग परिसर है।

इसकी विशेषता यह है कि यहां विभिन्न किस्मों के कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जा सकता है।

कंपनी के अनुसार, परिसर का उच्च तकनीकी जटिलता सूचकांक भारी कच्चे तेल को उपयोगी पेट्रोलियम उत्पादों में बदलने में मदद करता है।

यही क्षमता अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और तेल उत्पादक देशों के लिए जामनगर को महत्वपूर्ण बनाती है।

वैश्विक तेल बाजार में बढ़ी अनिश्चितता

रुबियो की यात्रा ऐसे समय हुई है, जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार युद्ध, प्रतिबंधों और समुद्री मार्गों में व्यवधान जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

पश्चिम एशिया में तनाव और प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं।

तेल की उपलब्धता और परिवहन लागत में बदलाव का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

रुबियो ने भी ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।

उनके अनुसार, केवल कच्चे तेल का उत्पादन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे उपयोगी ईंधन में बदलने की क्षमता भी जरूरी है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से भी जुड़ा दौरा

ऊर्जा सहयोग के साथ भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत जारी है।

रुबियो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

अमेरिका भारत को अधिक ऊर्जा उत्पाद बेचना चाहता है, जबकि भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर भी चर्चा का विषय हैं।

रिलायंस की अमेरिका में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना को भी इस व्यापक सहयोग के संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालांकि जामनगर यात्रा के दौरान किसी नए बाध्यकारी ऊर्जा समझौते की घोषणा नहीं की गई।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है दौरा?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

ऐसे में अलग-अलग देशों से तेल खरीदना और मजबूत रिफाइनिंग क्षमता बनाए रखना ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

वेनेजुएला और अमेरिका जैसे आपूर्तिकर्ताओं के साथ व्यापार बढ़ने से भारत को तेल खरीद के अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं।

हालांकि वास्तविक खरीद का फैसला कीमत, परिवहन लागत, गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर निर्भर करेगा।

जामनगर की रिफाइनिंग क्षमता भारत को केवल तेल आयात करने वाला देश नहीं, बल्कि तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता भी बनाती है।

मार्को रुबियो का जामनगर दौरा इस बात का संकेत है कि बदलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की रिफाइनिंग क्षमता का महत्व बढ़ रहा है। आने वाले समय में भारत-अमेरिका ऊर्जा व्यापार और वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद को लेकर होने वाले फैसलों पर नजर रहेगी।

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