लाइफ स्टाइल :  आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, धूम्रपान और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। इन्हीं समस्याओं के बीच स्ट्रोक यानी ब्रेन अटैक एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है। यह ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून की आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है या दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। समय पर इलाज नहीं मिलने की स्थिति में मरीज को स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है और उसकी जान भी जा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वर्ष 2021 में दुनियाभर में स्ट्रोक के लगभग 1.19 करोड़ नए मामले सामने आए थे। उसी वर्ष स्ट्रोक से प्रभावित लोगों की कुल अनुमानित संख्या 9.38 करोड़ थी। स्ट्रोक दुनियाभर में मौत और विकलांगता के संयुक्त बोझ का तीसरा प्रमुख कारण था।
क्या होता है स्ट्रोक और क्यों है इतना खतरनाक?
सामान्य भाषा में समझें तो स्ट्रोक उस स्थिति को कहते हैं, जब दिमाग के किसी हिस्से में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो जाती है।दिमाग की कोशिकाओं को सामान्य रूप से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। जब रक्त प्रवाह रुकता है, तो कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।स्ट्रोक के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं। पहला इस्केमिक स्ट्रोक, जिसमें खून का थक्का बनने या किसी अन्य रुकावट के कारण रक्त वाहिका बंद हो जाती है। दूसरा हेमोरेजिक स्ट्रोक, जिसमें दिमाग की रक्त वाहिका फटने से रक्तस्राव शुरू हो जाता है।दोनों ही स्थितियां बेहद गंभीर होती हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।
हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का सबसे बड़ा जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है।जब लंबे समय तक ब्लड प्रेशर अधिक रहता है, तो दिमाग की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे रक्त वाहिका बंद होने या फटने का खतरा बढ़ सकता है।WHO के अनुसार, उच्च रक्तचाप वाले लोगों में स्ट्रोक का जोखिम सामान्य रक्तचाप वाले लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक हो सकता है।इसके अलावा डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, हृदय रोग और धूम्रपान भी जोखिम बढ़ाते हैं।
शरीर में दिखाई देते हैं स्ट्रोक के ये शुरुआती लक्षण
स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक सामने आते हैं। ऐसे में इन्हें मामूली कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।मरीज के चेहरे का एक हिस्सा अचानक लटक जाना, हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होना, बोलने में परेशानी होना और अचानक संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।इसके अलावा एक या दोनों आंखों से अचानक दिखाई देने में परेशानी, बिना स्पष्ट कारण के तेज सिरदर्द और चलने में कठिनाई भी चेतावनी के लक्षण हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, इन लक्षणों के दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
BE FAST फॉर्मूले से पहचानें स्ट्रोक
स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ BE FAST फॉर्मूले का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
- B – Balance: अचानक संतुलन बिगड़ना या चक्कर आना।
- E – Eyes: अचानक आंखों से देखने में परेशानी।
- F – Face: चेहरे का एक हिस्सा अचानक झुक जाना।
- A – Arms: एक हाथ में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
- S – Speech: बोलने या दूसरे की बात समझने में कठिनाई।
- T – Time: लक्षण दिखाई देते ही तुरंत एंबुलेंस बुलाएं और लक्षण शुरू होने का समय दर्ज करें।
युवाओं में भी हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक
अक्सर लोग मानते हैं कि स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को होता है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है।हालांकि, बढ़ती उम्र के साथ स्ट्रोक का जोखिम अधिक होता है, लेकिन युवा भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।विशेष रूप से जिन लोगों को मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या हृदय से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहना चाहिए।धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान भी जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
स्ट्रोक होने पर एक-एक मिनट कीमती
स्ट्रोक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर इलाज मिलना है।मस्तिष्क तक खून की आपूर्ति बाधित होने के बाद जितनी देर उपचार में देरी होती है, गंभीर नुकसान का खतरा उतना बढ़ सकता है।इस्केमिक स्ट्रोक के कुछ मरीजों में रक्त का थक्का घोलने वाली दवाएं दी जा सकती हैं। चयनित मामलों में विशेष प्रक्रिया के माध्यम से रक्त वाहिका में फंसा थक्का भी निकाला जा सकता है।वहीं, हेमोरेजिक स्ट्रोक में रक्तस्राव नियंत्रित करने और दिमाग पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अलग तरह के उपचार की जरूरत होती है।किस मरीज को कौन-सा इलाज दिया जाएगा, इसका निर्णय डॉक्टर सीटी स्कैन, अन्य जांचों और मरीज की स्थिति के आधार पर करते हैं।
इन आदतों से कम हो सकता है स्ट्रोक का खतरा
स्ट्रोक के सभी मामलों को रोकना संभव नहीं है, लेकिन कई जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त फल और सब्जियों के सेवन तथा नमक की मात्रा सीमित रखने की सलाह देते हैं।इसके अलावा धूम्रपान से बचना, शराब के हानिकारक सेवन से दूर रहना, वजन नियंत्रित रखना और ब्लड प्रेशर तथा ब्लड शुगर की नियमित जांच कराना भी उपयोगी है।जिन लोगों को पहले से उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या हृदय रोग हैं, उन्हें डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं और उपचार का नियमित पालन करना चाहिए।
कुछ मिनट में लक्षण ठीक हो जाएं तो भी सावधान
कई बार स्ट्रोक जैसे लक्षण कुछ मिनटों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। इस स्थिति को ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) कहा जाता है।इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। TIA भविष्य में बड़े स्ट्रोक का चेतावनी संकेत हो सकता है।ऐसी स्थिति में भी तत्काल मेडिकल जांच आवश्यक है।
जागरूकता और समय पर इलाज से बच सकती है जान
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि स्ट्रोक केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है।समय पर लक्षणों की पहचान, जोखिम कारकों पर नियंत्रण और उचित चिकित्सा सहायता से स्ट्रोक के गंभीर परिणामों को कम किया जा सकता है।
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