लाइफ स्टाइल : आजकल मोबाइल फोन लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। कई लोगों की सुबह फोन देखने से शुरू होती है और रात सोशल मीडिया पर वीडियो या रील्स देखते हुए गुजरती है। मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। कम उम्र के बच्चे भी वीडियो देखने, गेम खेलने और किड्स रील्स स्क्रॉल करने में काफी समय बिताने लगे हैं। कुछ बच्चों को खाना खिलाने या शांत रखने के लिए भी मोबाइल का सहारा लिया जाता है, जो धीरे-धीरे उनकी आदत बन सकता है।
बच्चों का जरूरत से ज्यादा स्क्रीन पर समय बिताना उनकी नींद, पढ़ाई, शारीरिक गतिविधियों और परिवार के साथ संवाद को प्रभावित कर सकता है। इसी समस्या से निपटने के लिए एक महिला ने अपने नौ वर्षीय बच्चे के लिए सात नियम बनाए। महिला के अनुसार, नियमित रूप से इन नियमों का पालन करने के बाद बच्चे की मोबाइल देखने की आदत काफी हद तक छूट गई। माता-पिता भी बच्चे की उम्र और दैनिक दिनचर्या को देखते हुए इन तरीकों को अपना सकते हैं।
सुबह से शाम तक तय करें नो स्क्रीन टाइम
बच्चों के लिए स्क्रीन इस्तेमाल का निश्चित समय निर्धारित करना सबसे जरूरी कदम है। महिला ने सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक बच्चे के लिए मोबाइल, टैबलेट और टीवी का इस्तेमाल बंद रखा। माता-पिता स्कूल और पढ़ाई की समय-सारिणी के अनुसार इसमें बदलाव कर सकते हैं। फोन से दूर रहने पर बच्चे होमवर्क, आउटडोर गेम, ड्रॉइंग, संगीत या अपनी पसंद की दूसरी गतिविधियों में समय लगा सकते हैं।
 भोजन के दौरान बंद रखें फोन और टीवी
घर में नियम बनाएं कि नाश्ते, दोपहर और रात के भोजन के दौरान कोई भी सदस्य फोन या टीवी का इस्तेमाल नहीं करेगा। यह नियम केवल बच्चे पर लागू न करें, बल्कि माता-पिता भी इसका पालन करें। महिला का कहना है कि यह नियम अपनाने के लगभग एक सप्ताह बाद परिवार के सदस्यों ने भोजन के दौरान एक-दूसरे से बातचीत शुरू कर दी। इससे बच्चे का ध्यान खाने पर भी केंद्रित रहता है।
 स्क्रीन टाइम को बनाएं रिवॉर्ड
बच्चे को बिना किसी सीमा के मोबाइल देने के बजाय स्क्रीन टाइम को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। उदाहरण के लिए, 30 मिनट किताब पढ़ने के बदले सीमित स्क्रीन टाइम या एक घंटे बाहर खेलने के बाद कुछ समय पसंदीदा कार्यक्रम देखने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि स्क्रीन को हर काम का इनाम न बना दिया जाए। इससे बच्चे की मोबाइल के प्रति उत्सुकता और बढ़ सकती है।
 सुबह का पहला घंटा रखें स्क्रीन फ्री
बच्चे को जागने के तुरंत बाद फोन देने से बचें। सुबह का पहला घंटा स्क्रीन से मुक्त रखा जा सकता है। इस दौरान बच्चा तैयार होने, किताब पढ़ने, चित्र बनाने, परिवार से बातचीत करने या हल्की शारीरिक गतिविधि में समय बिता सकता है। यह आदत दिन की शुरुआत व्यवस्थित ढंग से करने में सहायता कर सकती है।
 फोन को बच्चे के कमरे से रखें दूर
रात में फोन या टैबलेट बच्चे के कमरे में न रखें। उपकरण को ऐसी जगह चार्ज करें, जहां माता-पिता उसकी निगरानी कर सकें। कम उम्र के बच्चों के लिए खुद स्क्रीन की सीमा तय करना मुश्किल हो सकता है। फोन पास नहीं रहने से देर रात वीडियो देखने और गेम खेलने की संभावना कम हो सकती है।
 माता-पिता पहले बदलें अपनी आदत
बच्चे कही गई बातों से अधिक घर के बड़ों के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। यदि माता-पिता लगातार फोन चलाते रहेंगे तो बच्चे को मोबाइल से दूर रहने के लिए कहना प्रभावी नहीं होगा। इसलिए परिवार के सभी सदस्यों के लिए कुछ समय स्क्रीन मुक्त रखना चाहिए। माता-पिता बच्चों के सामने अनावश्यक स्क्रॉलिंग बंद करके उदाहरण पेश कर सकते हैं।
 विरोध के बावजूद बनाए रखें निरंतरता
नए नियम लागू होने पर बच्चा नाराज हो सकता है या मोबाइल मांग सकता है। ऐसी स्थिति में गुस्सा करने के बजाय शांत और स्पष्ट तरीके से तय सीमा पर कायम रहें। नियमों को अचानक बेहद सख्त बनाने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करना बेहतर हो सकता है। बच्चे के खाली समय के लिए खेल, किताबें और रचनात्मक गतिविधियां उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
ये तरीके एक अभिभावक के निजी अनुभव पर आधारित हैं और हर बच्चे पर इनका प्रभाव अलग हो सकता है। यदि मोबाइल न मिलने पर बच्चा अत्यधिक गुस्सा करे, उसकी नींद या पढ़ाई प्रभावित हो अथवा व्यवहार में गंभीर बदलाव दिखे तो बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य मनोवैज्ञानिक से सलाह लेनी चाहिए।
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