गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले से दुखद खबर सामने आई है। हथुआ थाना क्षेत्र के भरतपुरा गांव निवासी और बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की चचेरी भाभी नीलम देवी का गुरुवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि पटना के मेदांता अस्पताल में हृदय रोग से संबंधित ऑपरेशन के बाद वह अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन तत्काल उन्हें हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े हो गए। नीलम देवी के पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पड़ने पर पता चला कि अस्पताल का मार्चरी चैंबर वर्षों से बंद पड़ा है। इसके कारण सदर अस्पताल से मार्चरी चैंबर मंगवाने की व्यवस्था करनी पड़ी। इस घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था में उपलब्ध संसाधनों और उनके रखरखाव की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पटना में हुआ था हृदय रोग का ऑपरेशन

मिली जानकारी के अनुसार, नीलम देवी हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं। उनका उपचार पटना के मेदांता अस्पताल में चल रहा था, जहां उनका ऑपरेशन किया गया था।

ऑपरेशन के बाद वह परिजनों के साथ अपने घर लौट रही थीं। हालांकि, ऑपरेशन कब हुआ था और चिकित्सकों ने उन्हें किन परिस्थितियों में अस्पताल से छुट्टी दी थी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इसी तरह उनकी उम्र और बीमारी से संबंधित चिकित्सकीय विवरण भी सामने नहीं आया है।

घर लौटते समय अचानक बिगड़ी तबीयत

परिजनों के अनुसार, पटना से लौटते समय रास्ते में नीलम देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

स्थिति गंभीर होने पर परिवार के सदस्य उन्हें तत्काल हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल में चिकित्सकों ने उनकी जांच की, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हालांकि, उनकी मृत्यु का सटीक चिकित्सकीय कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। केवल ऑपरेशन के बाद निधन होने के आधार पर इसे ऑपरेशन की जटिलता से जोड़ना उचित नहीं होगा।

परिवार में शोक का माहौल

नीलम देवी के निधन की खबर से परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है।

वह बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की चचेरी भाभी थीं और गोपालगंज जिले के भरतपुरा गांव की निवासी थीं।

अचानक हुई इस घटना से परिवार को गहरा आघात पहुंचा है।

परिजन उन्हें उपचार के बाद घर लेकर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें दोबारा अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

हालांकि, अंतिम संस्कार और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अस्पताल में बंद मिला मार्चरी चैंबर

नीलम देवी के निधन के बाद हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल की व्यवस्थाओं में एक गंभीर कमी सामने आई।

बताया गया कि पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने के लिए अस्पताल में उपलब्ध मार्चरी चैंबर का उपयोग नहीं किया जा सका।

इसका कारण यह था कि अस्पताल का मार्चरी चैंबर वर्षों से बंद पड़ा है।

ऐसी स्थिति में शव को सुरक्षित रखने के लिए सदर अस्पताल से मार्चरी चैंबर मंगवाने की व्यवस्था करनी पड़ी।

इस घटना से सवाल उठ रहा है कि अनुमंडलीय स्तर के अस्पताल में आवश्यक उपकरण लंबे समय से बंद क्यों हैं।

सदर अस्पताल से करनी पड़ी वैकल्पिक व्यवस्था

हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल में मार्चरी चैंबर काम नहीं करने के कारण दूसरे अस्पताल की मदद लेने की आवश्यकता पड़ी।

जानकारी के मुताबिक, सदर अस्पताल से मार्चरी चैंबर मंगवाने की व्यवस्था की गई।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उपकरण अस्पताल तक कब पहुंचा और पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने की अंतिम व्यवस्था किस प्रकार की गई।

इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान भी उपलब्ध नहीं है।

फिर भी घटना ने आपात परिस्थितियों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता का मुद्दा सामने ला दिया है।

वर्षों से बंद उपकरण पर उठे सवाल

किसी भी अस्पताल में मार्चरी चैंबर का उपयोग मृत व्यक्तियों के पार्थिव शरीर को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।

विशेष परिस्थितियों में इसकी आवश्यकता तब पड़ती है, जब परिजनों को अंतिम संस्कार की तैयारी के लिए समय चाहिए या अन्य औपचारिकताएं पूरी की जानी हों।

हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल में यह सुविधा वर्षों से बंद होने की जानकारी गंभीर चिंता का विषय है।

हालांकि, चैंबर किस तकनीकी खराबी के कारण बंद है और इसे ठीक कराने के लिए पहले क्या प्रयास किए गए, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की जरूरत

हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है।

ऐसे अस्पतालों में उपचार के साथ आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक उपकरणों का कार्यशील होना जरूरी है।

यदि कोई महत्वपूर्ण उपकरण लंबे समय से बंद है, तो उससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इस मामले में मार्चरी चैंबर की अनुपलब्धता के कारण दूसरे अस्पताल से वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।

घटना के बाद संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से उपकरण की स्थिति और मरम्मत की योजना स्पष्ट किए जाने की अपेक्षा की जा रही है।

उपकरणों के रखरखाव पर भी ध्यान जरूरी

अस्पतालों में उपकरण उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है, उनका नियमित रखरखाव और समय पर मरम्मत भी आवश्यक है।

मार्चरी चैंबर जैसी सुविधाएं हर दिन उपयोग में नहीं आतीं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर उनका तुरंत काम करना महत्वपूर्ण होता है।

हथुआ अस्पताल में लंबे समय से बंद पड़े चैंबर की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि उपकरणों की नियमित जांच किस तरह की जा रही है।

हालांकि, इस मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होने की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

दुखद घटना के साथ सामने आई व्यवस्था की कमी

नीलम देवी का निधन परिवार के लिए बड़ी क्षति है। हृदय रोग से संबंधित ऑपरेशन के बाद घर लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ी और हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

इस दुखद घटना के साथ अस्पताल में बंद पड़े मार्चरी चैंबर की समस्या भी सामने आई।

सदर अस्पताल से वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ने से स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति चर्चा में आ गई है।

अब देखना होगा कि अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।

Tags: