नवादा: नारदीगंज स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय (CDPO) की बदहाल स्थिति सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पिछले 14 वर्षों से यह कार्यालय एक पुराने और जर्जर डाक बंगला भवन में संचालित हो रहा है। भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी हर दिन किसी अनहोनी की आशंका के बीच अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं।
बरसात के मौसम में कार्यालय की स्थिति और भी खराब हो जाती है। छत से लगातार पानी टपकने के कारण कमरे में जलजमाव हो जाता है। बारिश का पानी कार्यालय में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच रहा है, जिससे रिकॉर्ड खराब होने का खतरा बना हुआ है। हालात यह हैं कि पानी से बचाने के लिए CDPO को मजबूरी में कार्यालय की छत पर त्रिपाल लगवाना पड़ा है।
नारदीगंज बाल विकास परियोजना कार्यालय का अपना भवन अब तक नहीं बन सका है। जिस डाक बंगला भवन में कार्यालय चल रहा है, वह करीब तीन दशक पुराना बताया जा रहा है। भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें आ गई हैं और छत का प्लास्टर भी कमजोर हो चुका है। कर्मचारियों के अनुसार, कई बार छत का प्लास्टर गिर चुका है। हाल ही में प्लास्टर गिरने से अधिकारी और कर्मी चोटिल भी हो गए थे।
मंगलवार 21 जुलाई 2026 को हुई तेज बारिश के बाद कार्यालय की स्थिति और खराब हो गई। छत से पानी का रिसाव इतना बढ़ गया कि कार्यालय में रखे कई जरूरी दस्तावेज भीग गए। इसके बाद मजबूरी में कार्यालय परिसर में बैठकर सरकारी कार्यों का निपटारा करना पड़ा।
कार्यालय में वर्तमान समय में CDPO मंजू कुमारी सहित कई अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें प्रखंड समन्वयक, महिला पर्यवेक्षक, लिपिक और डेटा ऑपरेटर शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जर्जर भवन में काम करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। बारिश के दौरान उन्हें अपने दस्तावेज और उपकरण बचाने के साथ-साथ खुद की सुरक्षा की भी चिंता रहती है।
इस भवन में कुल तीन कमरे और एक बरामदा है। एक कमरे में अधिकारी बैठते हैं, जबकि अन्य कमरों में कर्मचारी काम करते हैं। सेविका और सहायिकाओं की बैठक आयोजित करने में भी परेशानी होती है। भवन में दरवाजों की स्थिति भी खराब है, जिसके कारण परिसर में अनधिकृत वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों ने चिंता जताई कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नए भवन का निर्माण नहीं किया गया तो किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बताया जाता है कि वर्ष 2014 में तत्कालीन CDPO संगीता कुमारी ने कार्यालय के लिए नए भवन निर्माण को लेकर जमीन उपलब्ध कराने के संबंध में तत्कालीन अंचल अधिकारी को पत्र लिखा था। लेकिन करीब एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
CDPO मंजू कुमारी ने बताया कि कार्यालय के नए भवन निर्माण को लेकर कई बार जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या लगातार बनी रहती है, इसलिए बचाव के लिए छत पर त्रिपाल लगाना पड़ा है।
नारदीगंज CDPO कार्यालय की यह स्थिति सरकारी भवनों की देखरेख और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कर्मचारियों को सुरक्षित कार्यस्थल कब तक उपलब्ध कराया जाता है।