49 गांवों की बदलेगी तस्वीर, बनेगा राम-जानकी फोर लेन मार्ग

Update: 2026-07-22 09:24 GMT

उत्तर प्रदेश: अयोध्या और जनकपुर को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी राम-जानकी पथ परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में इस फोरलेन सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यह परियोजना धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सड़क बनने के बाद भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या और माता जानकी की नगरी जनकपुर के बीच आवागमन काफी आसान हो जाएगा।

राम-जानकी पथ परियोजना के तहत पूर्वी चंपारण में करीब 56 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए जिले में जमीन अधिग्रहण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पांच सदस्यीय कमेटी द्वारा भूमि की जांच का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके बाद अधिसूचना जारी करने और खेसरा पंजी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यह सड़क पूर्वी चंपारण जिले के सात अंचलों के 49 राजस्व गांवों से होकर गुजरेगी। प्रस्तावित मार्ग के अनुसार, केसरिया अंचल के ढेकहां क्षेत्र से सड़क जिले में प्रवेश करेगी। इसके बाद यह पताही होते हुए शिवहर जिले की ओर जाएगी। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सड़क निर्माण से इन क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और ग्रामीण इलाकों को सीधा लाभ मिलेगा।

राम-जानकी पथ से गुजरने वाले गांवों में केसरिया के 11, कल्याणपुर के 15, चकिया के तीन, मेहसी के एक, मधुबन के 13, फेनहारा के पांच और पताही के एक राजस्व गांव शामिल हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी।

इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। अयोध्या से जनकपुर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग एक महत्वपूर्ण धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा। वर्तमान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़े धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए यात्रा करते हैं। फोरलेन सड़क बनने के बाद यात्रा का समय कम होगा और सुविधाएं बढ़ेंगी।

राम-जानकी पथ के रास्ते में कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी जुड़ेंगे। श्रद्धालु विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप, सोमेश्वर धाम और कल्याणपुर के जानकी नगर में बन रहे विराट रामायण मंदिर के दर्शन कर सकेंगे। इसके अलावा ऐतिहासिक सीताकुंड भी इस मार्ग से जुड़ेगा, जहां मान्यता है कि माता सीता और भगवान श्रीराम ने जनकपुर से विवाह के बाद वापसी यात्रा के दौरान प्रवास किया था।

यह सड़क बिहार के सीतामढ़ी होते हुए नेपाल के जनकपुर धाम तक धार्मिक यात्राओं को आसान बनाएगी। इससे भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

परियोजना का असर केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलने की संभावना है। सड़क निर्माण के बाद इसके आसपास होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, वे-साइड सुविधाएं और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा और जमीनों की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है। छोटे व्यापारियों, किसानों और स्थानीय कारोबारियों को बाजार तक पहुंच आसान होगी, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। पूर्वी चंपारण के एडीएलओ कुमार विमल कांत ने बताया कि पांच सदस्यीय टीम की जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही भूमि अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

राम-जानकी पथ केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय विकास को जोड़ने वाली बड़ी योजना के रूप में देखा जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद अयोध्या से जनकपुर तक का सफर आसान होने के साथ-साथ उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।

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