बिहार में पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, 6 गिरफ्तार

Update: 2026-07-18 14:19 GMT

पटना। बिहार में पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। उत्तर बिहार और सीमांचल के कई इलाकों में लगातार सामने आ रहे मामलों ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मार्च 2026 से अब तक पाकिस्तानी कनेक्शन के संदेह में छह लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इन मामलों के सामने आने के बाद बिहार पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच तेज कर दी है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों के बीच कोई आपसी कनेक्शन है या नहीं। इसके लिए संदिग्धों की पूरी प्रोफाइल तैयार की जा रही है। उनके मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, सोशल मीडिया गतिविधियों और यात्रा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आए। आरोप है कि इंटरनेट मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। इसमें वाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान में बैठे कुछ लोग युवाओं को लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें पैसे, हथियार या अन्य प्रलोभन देकर उन्हें कट्टरपंथी गतिविधियों की ओर आकर्षित करने के आरोपों की जांच की जा रही है। कुछ मामलों में संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाने की बात भी सामने आई है।

हाल के महीनों में बिहार के अलग-अलग जिलों में हुई गिरफ्तारियों ने इस नेटवर्क की गतिविधियों पर सवाल खड़े किए हैं। सीतामढ़ी में जुलाई 2026 में पुलिस ने मोहम्मद अखलाक और मोहम्मद अरमान नामक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। जांच में इनके सोशल मीडिया संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि दोनों पाकिस्तानी गैंगस्टर्स के संपर्क में थे और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश से जुड़े हो सकते हैं।

कटिहार जिले के कोढ़ा थाना क्षेत्र से भी मोहम्मद अहद नामक युवक को गिरफ्तार किया गया। उस पर पाकिस्तानी गैंगस्टर नेटवर्क से संपर्क में रहने और संवेदनशील जानकारियां साझा करने का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसियां उसके डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही हैं।

मधुबनी में जून 2026 में बिहार और मध्य प्रदेश ATS की संयुक्त कार्रवाई में मौलाना इजहारुल हक को पकड़ा गया था। उस पर भी पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में रहने और कथित कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़े होने की जांच चल रही है।

इसके अलावा मुजफ्फरपुर में भी दो मामलों में कार्रवाई हुई है। मई 2026 में बिहार ATS ने मोहम्मद मुस्तफा को गिरफ्तार किया था। उस पर पाकिस्तान स्थित हथियार तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने और संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें व वीडियो साझा करने का आरोप है। वहीं, मार्च 2026 में मुजफ्फरपुर निवासी नौशाद अली उर्फ लालू को भी कथित जासूसी नेटवर्क से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।

इन सभी मामलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर डिजिटल निगरानी भी बढ़ाई गई है।

पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बिहार में सक्रिय यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार किन-किन लोगों से जुड़े हुए हैं। संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। एजेंसियां जासूसी नेटवर्क के अलावा हथियार और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों का पूरा ध्यान नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने पर है।

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