गांव-गांव पहुंचेगा सुधा का नेटवर्क, 2,150 नई दुग्ध समितियों में शुरू हुआ दूध संग्रहण
पटना। बिहार में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और पशुपालक किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड (कॉम्फेड) के माध्यम से गांव-गांव में प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों का विस्तार किया जा रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 4,800 नई दुग्ध उत्पादक समितियों का गठन किया गया है। इनमें से 2,150 समितियां कार्यशील हो चुकी हैं और इनके माध्यम से दूध का संग्रहण भी शुरू हो गया है। नई समितियों के संचालन से प्रतिदिन लगभग 91 हजार किलोग्राम अतिरिक्त दूध का संग्रहण किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादकों को संगठित बाजार उपलब्ध कराना, बिचौलियों पर निर्भरता कम करना और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक गांवों के पशुपालक सहकारी व्यवस्था से जुड़कर अपने दूध की नियमित बिक्री कर सकें।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 4,800 नई समितियों का गठन
बिहार में डेयरी क्षेत्र के विस्तार को लेकर सरकार लगातार योजनाओं पर काम कर रही है।
इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 4,800 प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों का गठन किया गया है।
इन समितियों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ना है।
समिति बनने से पशुपालकों को दूध की बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर एक संगठित व्यवस्था उपलब्ध हो सकती है।
इसके माध्यम से छोटे और सीमांत पशुपालक भी अपने दूध को नियमित रूप से बेचने की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार की योजना उन गांवों तक सहकारी नेटवर्क पहुंचाने की है, जहां अब तक संगठित दूध संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
2,150 समितियों में शुरू हुआ दूध संग्रहण
नई गठित 4,800 समितियों में से 2,150 समितियां अब तक कार्यशील हो चुकी हैं।
इन समितियों के माध्यम से दूध संग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को दूध बेचने के लिए नए अवसर मिल रहे हैं।
वहीं, शेष 2,650 समितियों को कार्यशील बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।
समितियों के नियमित संचालन के लिए दूध संग्रहण, गुणवत्ता जांच, परिवहन और भुगतान संबंधी व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।
इन सुविधाओं के विकसित होने पर ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को सहकारी नेटवर्क से अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रतिदिन 91 हजार किलो अतिरिक्त दूध का संग्रहण
विभागीय जानकारी के अनुसार, नई समितियों के संचालन से प्रतिदिन लगभग 91 हजार किलोग्राम अतिरिक्त दूध का संग्रहण हो रहा है।
यह डेयरी क्षेत्र में सहकारी नेटवर्क के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है।
दूध का संग्रहण बढ़ने से प्रसंस्करण इकाइयों को अतिरिक्त कच्चा माल उपलब्ध हो सकता है।
इसके साथ ही दूध से दही, पनीर, घी और अन्य उत्पाद तैयार करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि, दूध संग्रहण में वृद्धि और पशुपालकों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी का आकलन खरीद मूल्य, उत्पादन लागत तथा नियमित भुगतान के आधार पर ही किया जा सकेगा।
गांवों में ही दूध बेच सकेंगे पशुपालक
दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके माध्यम से गांवों में ही दूध संग्रहण की व्यवस्था की जाती है।
इससे पशुपालकों को दूध बेचने के लिए दूर की मंडियों या बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
छोटे पशुपालकों के पास अक्सर दूध की मात्रा सीमित होती है।
ऐसी स्थिति में अलग-अलग बाजारों तक दूध पहुंचाने में समय और परिवहन खर्च बढ़ सकता है।
सहकारी समिति के माध्यम से नियमित संग्रहण होने पर उन्हें स्थानीय स्तर पर दूध बिक्री का विकल्प मिलता है।
कॉम्फेड की सहकारी व्यवस्था में पशुपालकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दूध बेचने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
सुधा के नेटवर्क को मिलेगा विस्तार
बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड अपने दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री 'सुधा' ब्रांड के नाम से करता है।
यह ब्रांड बिहार के डेयरी क्षेत्र से जुड़ा प्रमुख नाम है।
नई समितियों के गठन से सुधा के लिए दूध संग्रहण का आधार और व्यापक हो सकता है।
इससे दूध प्रसंस्करण और विपणन गतिविधियों को भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार गांवों में दूध संग्रहण के साथ पंचायत स्तर पर सुधा बिक्री केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की जनवरी 2026 की घोषणा में सभी गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन और प्रत्येक पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया था।
पशुपालकों को मिल सकती हैं अतिरिक्त सुविधाएं
दुग्ध सहकारी समितियां केवल दूध खरीदने तक सीमित नहीं होतीं।
इनके माध्यम से पशुपालकों को पशुचारा, चारा बीज और पशुओं के स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
बिहार सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कॉम्फेड की सहकारी व्यवस्था से जुड़े पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान, कृमिनाशक और टीकाकरण जैसी सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं।
इन सुविधाओं का उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन की क्षमता को बेहतर बनाना है।
यदि पशुपालकों को समय पर आवश्यक सेवाएं मिलती हैं, तो पशुपालन की लागत और उत्पादन संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में सहायता हो सकती है।
डेयरी विकास के लिए सरकार ने दी वित्तीय स्वीकृति
राज्य सरकार ने दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार के लिए वित्तीय व्यवस्था भी की है।
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 10 सितंबर 2026 को सात निश्चय-3 के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 22.40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से गांवों में प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों के गठन और संचालन की स्वीकृति दी गई थी।
इसके अतिरिक्त दूध संग्रहण और गुणवत्ता जांच से जुड़ी सुविधाओं के विकास के लिए भी अलग-अलग योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
इनमें बल्क मिल्क कूलर, दूध संग्रहण इकाइयां और मिलावट जांच उपकरण जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
महिलाओं और छोटे पशुपालकों को भी लाभ की उम्मीद
बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन अनेक परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है।
विशेष रूप से छोटे किसानों और ग्रामीण महिलाओं की पशुपालन गतिविधियों में बड़ी भूमिका होती है।
दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार ऐसे परिवारों को संगठित बाजार से जुड़ने का अवसर प्रदान कर सकता है।
केंद्र सरकार की डेयरी सहकारिता संबंधी योजना में भी महिलाओं और छोटे दुग्ध उत्पादकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इसके अंतर्गत नई समितियों के गठन और मौजूदा समितियों के सशक्तीकरण के माध्यम से बेहतर बाजार पहुंच उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
दूध की गुणवत्ता जांच और शीतलन व्यवस्था जरूरी
दूध संग्रहण बढ़ने के साथ गुणवत्ता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
दूध जल्दी खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है, इसलिए संग्रहण के बाद उसे उचित तापमान पर सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।
इसके लिए शीतलन केंद्र और बल्क मिल्क कूलर जैसी सुविधाएं उपयोगी हैं।
साथ ही दूध की गुणवत्ता जांच से खरीद और प्रसंस्करण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत दूध शीतलन और जांच उपकरण स्थापित करने की स्वीकृति दी है।
इन सुविधाओं का प्रभावी संचालन नई दुग्ध समितियों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सभी गांवों तक सहकारी नेटवर्क पहुंचाने का लक्ष्य
बिहार सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी दुग्ध उत्पादन व्यवस्था को मजबूत करना है।
नई समितियों के गठन से ऐसे गांवों को जोड़ा जा सकता है, जहां पहले दूध संग्रहण की संगठित व्यवस्था नहीं थी।
हालांकि, समिति का गठन और उसका वास्तविक संचालन दो अलग-अलग चरण हैं।
इसी कारण सरकार के सामने गठित सभी समितियों को कार्यशील बनाने की चुनौती भी है।
इसके लिए सदस्यों की भागीदारी, संग्रहण केंद्रों की व्यवस्था, परिवहन सुविधा और भुगतान प्रणाली का मजबूत होना जरूरी है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिहार में 4,800 नई दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों का गठन और इनमें से 2,150 समितियों में संग्रहण शुरू होना डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नई समितियों के माध्यम से प्रतिदिन 91 हजार किलोग्राम अतिरिक्त दूध का संग्रहण होने की जानकारी से सहकारी नेटवर्क की बढ़ती गतिविधियों का संकेत मिलता है।
आने वाले समय में शेष समितियों को सक्रिय करना, पशुपालकों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराना और दूध की गुणवत्ता बनाए रखना प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।
यदि सभी समितियां प्रभावी ढंग से संचालित होती हैं, तो ग्रामीण पशुपालकों को दूध की बिक्री के नए अवसर मिलने के साथ उनकी आय बढ़ाने में भी सहायता मिल सकती है।