15 करोड़ की यूनिवर्सिटी बिल्डिंग में पहली बारिश में जलभराव, दीवारों में सीपेज

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Update: 2026-07-07 12:34 GMT
Durg. दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की करोड़ों रुपये की लागत से तैयार नई प्रशासनिक बिल्डिंग पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस बिल्डिंग में बारिश का पानी भर गया। भवन के कई कमरों, गलियारों और बेसमेंट में जलभराव की स्थिति बन गई, वहीं कई जगह दीवारों पर सीपेज और नमी भी देखने को मिली। सबसे बड़ी बात यह है कि भवन का निर्माण पूरा हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसे विश्वविद्यालय प्रशासन को आधिकारिक रूप से हैंडओवर नहीं किया गया है।

इसी वजह से विश्वविद्यालय का पूरा प्रशासनिक काम अभी भी करीब 48 साल पुराने भवन से संचालित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, नई प्रशासनिक बिल्डिंग का निर्माण दुर्ग के पोटियाकला में किया गया है। इस भवन के निर्माण पर 14.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा सड़क, ड्रेनेज सिस्टम, लिफ्ट, लैंडस्केपिंग और अन्य सुविधाओं के विकास के लिए करीब 5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी जारी किया गया था। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद भवन की सुविधाओं और निर्माण गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। बारिश के बाद सामने आई स्थिति ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, नई बिल्डिंग में पहले भी कई कमियां सामने आई थीं। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) को कई बार पत्र लिखकर समस्याओं को दूर करने के लिए कहा गया, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। इससे पहले दुर्ग कलेक्टर ने भी भवन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आई थीं, जिन्हें दूर करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इसके बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। बारिश के बाद भवन के बेसमेंट में पानी भर गया। इसके अलावा दीवारों में सीपेज और नमी की समस्या भी सामने आई। दोनों लिफ्ट भी बंद पड़ी हैं और उनके आसपास पानी जमा हो गया है। मुख्य प्रवेश द्वार की सीढ़ियों में टूट-फूट शुरू हो गई है। पार्किंग के शटर भी खराब होने लगे हैं।

नई प्रशासनिक बिल्डिंग से जुड़ी प्रमुख बातें:
नया परिसर पोटियाकला में बनाया गया है।
पूरा विश्वविद्यालय परिसर करीब 40 एकड़ में फैला है।
प्रशासनिक भवन के लिए 10 एकड़ जमीन निर्धारित है।
भवन निर्माण पर 14.92 करोड़ रुपये खर्च हुए।
अन्य सुविधाओं के लिए करीब 5 करोड़ रुपये का बजट दिया गया।
8 मार्च 2019 को भवन का भूमिपूजन हुआ था।
निर्माण कार्य वर्ष 2021 तक पूरा होना था।
वर्ष 2023 में देरी को लेकर रूसा (RUSA) ने निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी किया था।
वर्ष 2024 में निर्माण पूरा हुआ, लेकिन अब तक हैंडओवर नहीं हो सका।

परिसर में पानी की व्यवस्था के लिए लगाए गए तीन बोर में से दो खराब बताए जा रहे हैं। इसके कारण भविष्य में यहां पानी की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नई बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद उसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर पुराना प्रशासनिक भवन काफी जर्जर स्थिति में है। यह भवन पहले महिला कॉलेज के लिए उपयोग किया जाता था। पुराने भवन में कई बार छत का हिस्सा गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन यहां रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है कि नई बिल्डिंग की कमियों को जल्द दूर कर उसे हैंडओवर किया जाए, ताकि प्रशासनिक कार्य बेहतर तरीके से संचालित हो सकें।
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