रायपुर : छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने की दिशा में राज्य मंत्रिपरिषद ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विभागाध्यक्ष कार्यालय के लिए तीन नए पदों के सृजन को मंजूरी प्रदान की है। इस फैसले का उद्देश्य विभाग में प्रशासनिक नेतृत्व को मजबूत करना, विभिन्न विभागीय गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और सुशासन से जुड़ी नीतिगत एवं सुधारात्मक पहलों के क्रियान्वयन में तेजी लाना है। मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत तीन नए पदों में आयुक्त अथवा संचालक का एक पद, अपर संचालक का एक पद तथा विशेषज्ञ का एक पद शामिल है। विशेषज्ञ का पद अपर संचालक स्तर का होगा। इन पदों के सृजन से विभाग को प्रशासनिक प्रबंधन, पर्यवेक्षण और लोक प्रशासन तथा विधि संबंधी विषयों में विशेषज्ञता प्राप्त होगी।
आयुक्त और अपर संचालक समेत तीन पदों को मंजूरी
मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विभागाध्यक्ष कार्यालय में आयुक्त या संचालक का एक नया पद सृजित किया जाएगा। इसके साथ ही अपर संचालक का एक पद और अपर संचालक स्तर के विशेषज्ञ का एक पद भी स्वीकृत किया गया है। इन पदों के माध्यम से विभागीय कार्यों के संचालन, प्रशासनिक निर्णयों और विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेष रूप से विभागाध्यक्ष कार्यालय में नेतृत्व और पर्यवेक्षण की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में इन पदों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
सुशासन से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आएगी तेजी
राज्य सरकार का यह निर्णय सुशासन से संबंधित नीतिगत और सुधारात्मक प्रयासों को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग की प्रशासनिक क्षमता बढ़ने से नीतियों के क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और सुधारात्मक कार्यक्रमों की निगरानी को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। नए पदों के सृजन से प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण और निर्णय लेने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में भी सहायता मिल सकती है।
लोक प्रशासन और विधि संबंधी मामलों में मिलेगी विशेषज्ञता
मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत विशेषज्ञ का पद अपर संचालक स्तर का होगा। इस पद के सृजन से विभाग को लोक प्रशासन और विधि संबंधी विषयों में विशेषज्ञ सहायता प्राप्त होगी। प्रशासनिक नीतियों और सुधारात्मक पहलों के क्रियान्वयन में कई बार विधिक तथा प्रक्रियागत पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऐसे में विशेषज्ञ स्तर के पद से संबंधित विषयों पर मार्गदर्शन और विभागीय कार्यों के बेहतर संचालन में मदद मिलने की संभावना है।
बेहतर समन्वय और पर्यवेक्षण पर रहेगा जोर
मंत्रिपरिषद के इस फैसले का एक प्रमुख उद्देश्य विभाग के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाना है। आयुक्त अथवा संचालक और अपर संचालक जैसे पदों के सृजन से विभागीय नेतृत्व तथा कार्यों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों में बेहतर तालमेल स्थापित करने और सुशासन से जुड़े सुधारों को निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप लागू करने में सहायता मिलेगी। राज्य सरकार के इस निर्णय से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की कार्यक्षमता बढ़ने तथा नीतिगत और सुधारात्मक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि नए पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया, पात्रता, वेतनमान और नियुक्ति की समयसीमा के संबंध में उपलब्ध निर्णय में अलग से जानकारी नहीं दी गई है। फिलहाल मंत्रिपरिषद ने इन तीन पदों के सृजन को मंजूरी प्रदान की है।
Tags: