Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चित 'ज्ञानू-जानू' वीडियो विवाद को लेकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर भाजपा नेताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बाद रायपुर पुलिस ने अब अमित जोगी को पूछताछ के लिए तलब किया है। सिविल लाइन पुलिस ने उनके निवास पर नोटिस चस्पा करते हुए नोटिस मिलने के एक दिन के भीतर थाने में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन थाने में 3 नवंबर को अमित जोगी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस की ओर से उनके निवास पर लगाए गए नोटिस में कहा गया है कि प्रकरण से संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए उनसे पूछताछ जरूरी है। इसी आधार पर उन्हें निर्धारित समय के भीतर थाने पहुंचने के लिए कहा गया है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 352, 353(2), 356(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब मामले में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने और पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जाने का अर्थ आरोपों का सिद्ध होना नहीं है।
दरअसल, पूरा विवाद अमित जोगी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ था। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरह दिखने वाले मुखौटे पहने पात्रों को दिखाया गया था। वीडियो में दोनों पात्रों के बीच सांकेतिक विवाह और हनीमून से संबंधित दृश्य प्रस्तुत किए गए थे। बताया जा रहा है कि वीडियो को राजनीतिक व्यंग्य के रूप में साझा किया गया था। हालांकि, इसकी सामग्री और प्रस्तुतिकरण को लेकर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा का आरोप था कि वीडियो के माध्यम से संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है।
वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। भाजपा नेताओं ने रायपुर के सिविल लाइन थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी और अमित जोगी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राजेश मूणत सहित अन्य नेताओं ने भी वीडियो पर नाराजगी जताई थी। भाजपा नेताओं का कहना था कि राजनीतिक विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी व्यक्ति या संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है।
विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने संबंधित वीडियो पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी। इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से खेद भी जताया। उन्होंने स्वीकार किया कि जिस तरीके से अपनी बात प्रस्तुत की गई, वह उचित नहीं था। अमित जोगी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वह अपने विचारों और विश्वासों के अनुरूप किसी ऐसी मर्यादा को पार नहीं करना चाहते, जिसे वह स्वयं सही नहीं मानते। उनका कहना था कि वीडियो के माध्यम से वह जो राजनीतिक संदेश देना चाहते थे, वह उनके दृष्टिकोण से अब भी प्रासंगिक है, लेकिन उसे व्यक्त करने का तरीका सही नहीं था।
इस स्पष्टीकरण के बाद भी मामले को लेकर राजनीतिक विवाद शांत नहीं हुआ। भाजपा नेताओं की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। अब सिविल लाइन पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी करके जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमित जोगी पुलिस के नोटिस पर कब उपस्थित होते हैं और पूछताछ के दौरान अपना पक्ष किस तरह रखते हैं। पुलिस वीडियो से जुड़े तथ्यों और मामले की परिस्थितियों के संबंध में जानकारी जुटा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बार फिर राजनीतिक व्यंग्य, सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी कानूनी सीमाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है और आगे की स्थिति जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
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