पेड़ से गिरकर मौत भी प्राकृतिक आपदा मानी जाएगी: बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

छग

Update: 2026-07-10 17:03 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राकृतिक आपदा से जुड़े मुआवजे को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई व्यक्ति आंधी, तेज बारिश या तूफान जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों के दौरान पेड़ से गिरकर अपनी जान गंवाता है, तो ऐसी मौत को भी प्राकृतिक आपदा में हुई मृत्यु माना जाएगा। इस फैसले के बाद मृतक के परिवार को राज्य सरकार की राहत नीति के तहत आर्थिक सहायता पाने का अधिकार होगा। बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच ने राजनांदगांव जिले के मोहला क्षेत्र से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन को मृतक के बेटे को 4 लाख रुपए की सहायता राशि देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार को यह राशि 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

आंधी-तूफान के दौरान पेड़ से गिरने से हुई थी मौत
यह मामला राजनांदगांव जिले के मोहला क्षेत्र का है। यहां रहने वाले अमर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि उनके पिता श्यामूराम मंडावी 16 जुलाई 2020 को पेड़ पर चढ़कर लाख निकाल रहे थे। इसी दौरान अचानक मौसम खराब हो गया और तेज आंधी, बारिश एवं तूफान शुरू हो गया। खराब मौसम के कारण पेड़ पर चढ़े श्यामूराम का संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच की और पोस्टमॉर्टम समेत सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

मुआवजे के आवेदन को कर दिया गया था खारिज
पिता की मौत के बाद अमर सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार की प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत 4 लाख रुपए मुआवजे के लिए आवेदन किया था। मामले की जांच के बाद नायब तहसीलदार ने मुआवजा देने की सिफारिश भी की थी। हालांकि, एडिशनल कलेक्टर ने 1 फरवरी 2021 को आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पेड़ से गिरकर हुई मौत राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) के तहत प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में नहीं आती है। इसके बाद अमर सिंह ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि मौत सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि खराब मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण हुई थी।

हाईकोर्ट ने RBC के प्रावधानों का दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 9 जून 2015 के राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) की धारा-6 का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि आंधी, तूफान, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण होने वाली मौतों को प्राकृतिक आपदा के अंतर्गत माना जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसे केवल इस आधार पर राहत राशि से वंचित नहीं किया जा सकता कि घटना सीधे तौर पर किसी आपदा में नहीं हुई।

परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता
हाईकोर्ट ने माना कि श्यामूराम मंडावी की मौत सामान्य दुर्घटना नहीं थी। वह खराब मौसम और प्राकृतिक परिस्थिति के कारण हुई थी। इसलिए यह मामला प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में आता है और मृतक का परिवार राहत राशि पाने का हकदार है। कोर्ट के इस फैसले से ऐसे अन्य मामलों में भी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है, जहां प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण लोगों की मौत हो जाती है लेकिन उन्हें मुआवजा मिलने में परेशानी आती है। यह निर्णय राज्य में प्राकृतिक आपदा राहत व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
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