साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 10 आरोपी गिरफ्तार

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Update: 2026-07-07 15:54 GMT
Durg. दुर्ग। साइबर ठगी के मामलों में ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और छिपाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरणों में म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को प्राप्त करने, उसे अन्य खातों में भेजने और अवैध आर्थिक लाभ कमाने के लिए ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है। दुर्ग पुलिस ने इसी नेटवर्क को निशाना बनाते हुए कार्रवाई की है।

भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर साइबर ठगी में उपयोग किए गए संदिग्ध बैंक खातों की जांच की गई। जांच में सामने आया कि कई बैंक खातों में साइबर अपराध से प्राप्त राशि जमा हुई और बाद में उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस ने पाया कि संबंधित खाताधारकों ने अपने बैंक खाते स्वयं या अन्य लोगों के साथ मिलकर साइबर ठगी की रकम को प्राप्त करने, छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए उपलब्ध कराए थे। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

सिटी कोतवाली पुलिस ने 8 खाताधारकों को पकड़ा
थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक से जुड़े संदिग्ध खातों की जांच की। इस दौरान 106 खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। जांच के आधार पर पुलिस ने 8 खाताधारकों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल फोन, इंडियन ओवरसीज बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन खातों से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

छावनी थाना मामले में दो और गिरफ्तार
थाना छावनी में दर्ज साइबर ठगी से जुड़े प्रकरण में पुलिस पहले ही 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने संगठित गिरोह के दो अन्य आरोपी प्रेमलाल कौशिक और ललित कुमार को भी गिरफ्तार किया। इस मामले में अब तक कुल 17 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

कमीशन के लालच में उपलब्ध कराते थे बैंक खाते
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन या आर्थिक लाभ दिया जाता था। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को जमा करने और फिर दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता था। पुलिस ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए देना अपराध है। लालच में आकर ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

गिरफ्तार आरोपी
मोदित कुमार जैन, उम्र 26 वर्ष, भिलाई-3
करण टंडन, उम्र 21 वर्ष, सुपेला भिलाई
अवध किशोर, उम्र 55 वर्ष, खुर्सीपार भिलाई
संकेत कुमार दास, उम्र 27 वर्ष, खुर्सीपार
रविंद्र कौशिक, उम्र 20 वर्ष, खुर्सीपार
शहबाज आलम, उम्र 26 वर्ष, जामुल
ए. सागर, उम्र 36 वर्ष, सुपेला
प्रीति कौर, उम्र 37 वर्ष, सुपेला
प्रेमलाल कौशिक, उम्र 23 वर्ष, खुर्सीपार
ललित कुमार, उम्र 24 वर्ष, खुर्सीपार

दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को बैंक खाता, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंकिंग जानकारी उपलब्ध न कराएं। यदि कोई व्यक्ति कमीशन या अन्य लालच देकर बैंक खाता इस्तेमाल करने की बात करता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें। साइबर अपराध से संबंधित शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया जा सकता है।
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