छत्तीसगढ़ के लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत, कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना जल्द होगी लागू
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने बजट वर्ष 2026-27 के महत्वपूर्ण वादों में शामिल कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य के लाखों शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई यह महत्वाकांक्षी योजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। योजना को पारदर्शी, प्रभावी और कर्मचारियों के लिए अधिक उपयोगी बनाने के लिए सोमवार को नया रायपुर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा कर योजना के प्रारूप पर सुझाव लिए और कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान किया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें किसी भी शासकीय कर्मचारी या उनके आश्रित को गंभीर बीमारी के समय इलाज के लिए आर्थिक परेशानी या प्रशासनिक जटिलताओं का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि इलाज से लेकर क्लेम के भुगतान तक की प्रक्रिया सरल, तेज और जवाबदेह हो। बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने योजना का विस्तृत डिजिटल प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि योजना के अंतर्गत सभी पात्र कर्मचारियों का विशेष डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण किया जाएगा।
यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे कर्मचारियों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों की जानकारी सुरक्षित रखी जाएगी और अस्पतालों में उपचार के समय डिजिटल सत्यापन के जरिए कैशलैस सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रस्तुतीकरण में यह भी बताया गया कि योजना के तहत राज्य के साथ-साथ राज्य के बाहर के प्रमुख सरकारी एवं निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध (एम्पैनल) किया जाएगा। इसके लिए अस्पतालों और सरकार के बीच एक मजबूत आईटी आधारित क्लेम सेटलमेंट सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पतालों को समय पर भुगतान मिले और मरीजों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सरकार का मानना है कि समयबद्ध भुगतान से अस्पताल भी योजना में बेहतर सहयोग करेंगे और कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी।
बैठक में उपस्थित मंत्रालय कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने इस योजना का स्वागत करते हुए इसे शासकीय कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक और कल्याणकारी पहल बताया। संघ ने योजना तैयार करने में जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए इसे प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। कर्मचारी संघ का कहना था कि योजना का लाभ तभी पूरी तरह मिल सकेगा, जब इसके संचालन के लिए पर्याप्त प्रशासनिक संसाधन और वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। संघ ने सुझाव दिया कि योजना के लिए अलग से पर्याप्त बजट का प्रावधान रखा जाए ताकि अस्पतालों के क्लेम का भुगतान समय पर हो और कर्मचारियों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े। साथ ही दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मांग की गई।
आपातकालीन परिस्थितियों में यदि किसी गैर-मान्यता प्राप्त अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो वहां भी कैशलैस इलाज की अस्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराने के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। बैठक में डायग्नोस्टिक सुविधाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। कर्मचारी संघ ने कहा कि कई मान्यता प्राप्त अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी और एक्स-रे जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में इन अस्पतालों को बेहतर डायग्नोस्टिक सेंटरों से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि मरीजों को अलग-अलग जगह भटकना न पड़े और समय पर जांच कर उपचार शुरू हो सके। इसके अलावा संघ ने ओपीडी के माध्यम से इलाज कराने वाले कर्मचारियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की मांग की। सुझाव दिया गया कि ऐसे कर्मचारियों को सरकारी चिकित्सा केंद्रों अथवा अधिकृत काउंटरों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
इससे कर्मचारियों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम होगा और वे नियमित उपचार जारी रख सकेंगे। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए गए सभी सुझावों को सकारात्मक और व्यावहारिक बताते हुए भरोसा दिलाया कि योजना के अंतिम प्रारूप और गाइडलाइन तैयार करते समय इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा, बेहतर जांच सुविधाओं और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक के बाद यह संकेत भी मिले हैं कि राज्य सरकार जल्द ही कैशलैस चिकित्सा सुविधा योजना की आधिकारिक लॉन्चिंग की तारीख घोषित कर सकती है। योजना लागू होने के बाद लाखों शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को इलाज के दौरान नकद भुगतान की चिंता से राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को मजबूत करेगी, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में भी व्यापक सुधार का मार्ग प्रशस्त करेगी।