Raigarh. रायगढ़। “संस्कारों से युक्त रायगढ़, नशा-सट्टा से मुक्त रायगढ़” के संकल्प के साथ रायगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित दो दिवसीय जनजागरूकता प्रदर्शनी एवं कार्यशाला का समापन नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित पुलिस जन संवाद कार्यक्रम के साथ हुआ। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, अधिवक्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर नशा एवं जुआ-सट्टा के खिलाफ सामूहिक प्रयासों पर चर्चा की। कार्यक्रम में नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान ने कहा कि नशे के खिलाफ समाज को स्वयं आगे आना होगा और इसके लिए सभी को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपने मोहल्लों में जागरूकता फैलाने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को देने की अपील की।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ की पहचान उसके संस्कारों से है और नशा व सट्टा समाज के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को पुनर्वास और रोजगार से जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज की भागीदारी के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि नशा और सट्टा पर नियंत्रण के लिए प्रशासन, पुलिस और समाज को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने इसे सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए पुनर्वास पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
कार्यक्रम में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि जिले में अवैध शराब, गांजा, नशीले पदार्थ, जुआ और सट्टा के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि नशे के कारण अपराध, सड़क दुर्घटनाएं और सामाजिक समस्याएं बढ़ती हैं, इसलिए इस पर सख्ती जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों ने कई सुझाव दिए, जिनमें स्कूलों में जागरूकता अभियान, डि-एडिक्शन सेंटर की स्थापना, सोशल मीडिया सूचना समूह, ग्राम स्तर पर जन सूचना मित्र नियुक्त करना और नशा विरोधी गतिविधियों को मजबूत करना शामिल रहा। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्त रायगढ़ बनाने की शपथ ली और सामूहिक संकल्प व्यक्त किया। अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और समाज की सक्रिय भागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकेगा।