Raipur/Bilaspur. रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक स्थित शासकीय आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल में कथित अवैध फीस वसूली का मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। जनता से रिश्ता द्वारा वर्ष 2025 में प्रमुखता से उठाए गए इस मामले में 16 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने संबंधित अधिकारियों द्वारा अवैध शुल्क लिए जाने की बात स्वीकार की। याचिकाकर्ता की ओर से उपलब्ध कराई गई ऑर्डर शीट के विवरण के अनुसार, सरकारी वकील ने न्यायालय से मामले में आवश्यक आदेश पारित करने की बात भी कही।

जनता से रिश्ता ने लगातार उठाई थी विद्यार्थियों और अभिभावकों की आवाज
जनता से रिश्ता ने स्कूल में विद्यार्थियों से कथित अवैध फीस वसूली के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और शिक्षा विभाग की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। ग्रामीणों और अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि शासन के निर्देशों के बावजूद विद्यार्थियों से लगातार दो वर्षों तक फीस वसूली गई। अब मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। राज्य के वकील द्वारा अवैध शुल्क वसूली की बात स्वीकार किए जाने को शिकायतकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट में 16 अक्टूबर को हुई सुनवाई
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में नाबालिग पूर्णिमा नौरंगे बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के नाम से दर्ज याचिका WPC नंबर 4782/2026 की सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोविंद प्रसाद देवांगन और राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता अनिल पांडे उपस्थित रहे। उपलब्ध आदेश विवरण के अनुसार, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि मामले में जवाब 12 अक्टूबर 2026 को दाखिल किया जा चुका है। जवाब का अवलोकन करने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से कोई प्रत्युत्तर दाखिल नहीं करने की जानकारी दी गई। इस दौरान राज्य के अधिवक्ता ने संबंधित अधिकारियों द्वारा अवैध शुल्क लिए जाने की बात स्वीकार की और आवश्यक आदेश पारित किए जाने की बात कही। हालांकि, आदेश विवरण में प्राचार्य द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्वीकारोक्ति किए जाने का उल्लेख नहीं है। साथ ही न्यायालय ने अभी मामले का अंतिम निपटारा नहीं किया है।


याचिकाकर्ता को दो सप्ताह का समय, नवंबर में अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने विवाद की प्रकृति को देखते हुए मामले में आवश्यक पक्षकारों को शामिल करने की आवश्यकता बताई है। इसके लिए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने दो सप्ताह का समय प्रदान किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है। आगामी सुनवाई में आवश्यक पक्षकारों को शामिल किए जाने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।

दो शैक्षणिक सत्रों की फीस वसूली पर उठे सवाल
पूरा मामला सिमगा ब्लॉक स्थित शासकीय आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि विद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2023-24 और 2024-25 के दौरान विद्यार्थियों से विभिन्न मदों में फीस वसूली गई। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय में 400 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उनका कहना है कि यदि सभी विद्यार्थियों से शुल्क लिया गया है तो कुल वसूली लाखों रुपए तक पहुंच सकती है। हालांकि, वास्तविक राशि की पुष्टि रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगी। अभिभावकों ने मांग की थी कि विद्यार्थियों से ली गई रकम का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि फीस लेने के लिए सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त थी या नहीं।

जांच समिति कर रही दस्तावेजों की पड़ताल
मामले में गठित जांच समिति स्कूल के रिकॉर्ड, फीस रसीदों, विद्यार्थियों की संख्या और जमा राशि से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। विशेष रूप से वर्ष 2023-24 और 2024-25 के अभिलेखों की पड़ताल की जा रही है। जांच का प्रमुख उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किन मदों में कितनी राशि वसूली गई और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया। ग्रामीणों ने पूर्व में आरोप लगाया था कि शिकायतों के बावजूद संबंधित प्राचार्य के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई थी।

जनता से रिश्ता की खबर के बाद न्याय की उम्मीद
जनता से रिश्ता ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से जुड़े इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाया। वर्ष 2025 में मामला प्रकाशित होने के बाद शिकायतकर्ताओं ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी मांगें आगे बढ़ाईं और बाद में न्यायालय की शरण ली। अब हाईकोर्ट की सुनवाई में सामने आए घटनाक्रम से मामले में जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, फीस की कुल राशि, संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और संभावित कार्रवाई पर अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट तथा आगामी न्यायिक आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगी। जनता से रिश्ता जनहित से जुड़े मुद्दों, पीड़ितों की आवाज और सार्वजनिक संस्थानों में जवाबदेही के सवालों को प्रमुखता से उठाता रहा है। इस मामले में भी विद्यार्थियों और अभिभावकों की शिकायतों को सामने लाने का प्रयास किया गया। फिलहाल सभी की नजर 30 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है।
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