Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। पेपर लीक के मामले के बाद अब विश्वविद्यालय में खराब परीक्षा परिणामों को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। बीएससी कृषि सेकेंड सेमेस्टर के नतीजों से नाराज छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का घेराव कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने भी समर्थन दिया है। छात्रों की नाराजगी की बड़ी वजह विभिन्न कृषि महाविद्यालयों में घोषित परीक्षा परिणाम हैं। कांकेर कृषि कॉलेज में बीएससी कृषि सेकेंड सेमेस्टर के 107 विद्यार्थियों में से 100 छात्र फेल हो गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अनुत्तीर्ण होने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
तख्तियां लेकर छात्रों ने किया प्रदर्शन
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के बाहर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय की परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था पर नाराजगी जताई। इस दौरान छात्रों के हाथों में अलग-अलग नारों वाली तख्तियां नजर आईं। एक तख्ती पर लिखा था, 'एक कचौड़ी दो समोसा, फैकल्टी का क्या भरोसा।' इस नारे के माध्यम से छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा परिणामों में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि किसी भी छात्र के भविष्य पर प्रतिकूल असर न पड़े।
छात्रों ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। छात्रों की पहली मांग उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष जांच कर संशोधित परीक्षा परिणाम जारी करने की है। उनका कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। दूसरी मांग ईयर बैक सिस्टम को पूरी तरह समाप्त करने और इस संबंध में स्थायी नियम बनाने की है। तीसरी मांग के तहत छात्रों ने चार विषयों में पुनर्मूल्यांकन की सुविधा अनिवार्य करने की बात कही है। इसके साथ ही पुनर्मूल्यांकन शुल्क माफ करने और ग्रेस मार्क्स बढ़ाने की मांग भी उठाई गई है। वहीं, आरटीआई के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में लागू 'बुक रेफरेंस' संबंधी नियम को समाप्त करने की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा रहा।
कांकेर कृषि कॉलेज में 107 में से 100 छात्र फेल
विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कृषि महाविद्यालयों में हाल ही में बीएससी कृषि सेकेंड सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम जारी किए गए हैं। इनमें कांकेर कृषि कॉलेज का परिणाम चर्चा का विषय बन गया है। यहां कुल 107 विद्यार्थियों में से 100 छात्र अनुत्तीर्ण हुए हैं। इस परिणाम को लेकर विद्यार्थियों में नाराजगी है। छात्रों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके लिए उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कर संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की जा रही है।
NSUI ने दिया छात्रों के आंदोलन को समर्थन
विश्वविद्यालय परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन को एनएसयूआई का भी समर्थन मिला है। संगठन ने छात्रों की मांगों के समर्थन में प्रदर्शन में भागीदारी की। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा परिणाम उनके भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। छात्रों ने मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता और पुनर्मूल्यांकन की सुविधाओं में सुधार की मांग दोहराई है।
ABVP प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से की मुलाकात
इसी बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रतिनिधिमंडल ने भी छात्रों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखा। प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल से मुलाकात कर निशुल्क पुनर्मूल्यांकन सहित अन्य मांगों पर चर्चा की। चर्चा के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुनर्मूल्यांकन के लिए विषयों की सीमा दो से बढ़ाकर चार कर दी है। इससे अब विद्यार्थी अधिकतम चार विषयों में पुनर्मूल्यांकन करा सकेंगे। हालांकि, पुनर्मूल्यांकन शुल्क माफी, ईयर बैक सिस्टम समाप्त करने और अन्य मांगों पर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले फैसले पर नजर
पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा परिणामों को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करे और मूल्यांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करे। फिलहाल चार विषयों में पुनर्मूल्यांकन की सुविधा देने का निर्णय सामने आया है। अब बाकी मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है।
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