गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के सेमरदर्री कन्या छात्रावास में छात्राओं ने छात्रावास की अव्यवस्थाओं और अधीक्षिका रीतू गुप्ता के कथित व्यवहार के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने भोजन की खराब गुणवत्ता, आवश्यक सुविधाओं की कमी, मानसिक प्रताड़ना और छात्रावास के संसाधनों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि उन्होंने पहले भी संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और छात्रावास की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की है।
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में उन्हें समय पर नाश्ता उपलब्ध नहीं कराया जाता। कई बार नाश्ता देर से मिलता है, जिससे उनकी पढ़ाई और दिनचर्या प्रभावित होती है। इतना ही नहीं, दोपहर और रात के भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब बताई गई है। छात्राओं का आरोप है कि कई बार भोजन में कीड़े तक निकल चुके हैं, जिसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं किया गया। उनका कहना है कि खराब भोजन के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी उत्पन्न हो रही हैं।
छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रावास में साबुन सहित अन्य आवश्यक दैनिक उपयोग की सामग्री नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती। कई बार उन्हें अपनी जरूरत की चीजें खुद खरीदनी पड़ती हैं, जबकि इन सुविधाओं की व्यवस्था छात्रावास प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया।
अधीक्षिका रीतू गुप्ता के व्यवहार को लेकर भी छात्राओं ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वे भोजन, नाश्ते या अन्य सुविधाओं को लेकर शिकायत करती हैं तो उन्हें डांट-फटकार का सामना करना पड़ता है। छात्राओं के अनुसार, अधीक्षिका उनसे कहती हैं, "इतना ज्यादा खाना क्यों खाती हो।" इससे छात्राएं मानसिक रूप से आहत होती हैं और उन्हें अपमानित महसूस होता है।
छात्राओं का आरोप है कि अधीक्षिका उनके परिजनों को फोन कर यह तक कहती हैं कि "अपनी बेटी को यहां से ले जाइए, नहीं तो वह मेरी नौकरी खा जाएगी।" छात्राओं का कहना है कि इस तरह की बातें सुनकर उनके अभिभावक भी चिंतित हो जाते हैं और छात्राओं पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है।
विरोध कर रही छात्राओं ने छात्रावास के संसाधनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छात्रावास का सामान निजी उपयोग के लिए अधीक्षिका के घर भेजा जाता है। इसके अलावा छात्राओं से व्यक्तिगत कार्य भी कराए जाते हैं। आरोप है कि अधीक्षिका अपने लिए अलग भोजन बनवाती हैं और उसके बाद उपयोग किए गए बर्तन भी छात्राओं से धुलवाए जाते हैं। छात्राओं का कहना है कि वे पढ़ाई करने के लिए छात्रावास में रह रही हैं, न कि किसी के निजी कार्य करने के लिए।
छात्राओं ने बताया कि छात्रावास का वातावरण लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय उन्हें रोजमर्रा की समस्याओं और कथित प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस माहौल का उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि छात्रावास में ऐसी अधीक्षिका की नियुक्ति की जाए जो छात्राओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करे और छात्रावास की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए।
छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले जब उन्होंने अपनी समस्याओं की शिकायत की थी, तब मंडल संयोजक छात्रावास पहुंचे थे। छात्राओं के अनुसार, उस दौरान उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, कथित रूप से उन्हें यह भी धमकी दी गई कि यदि उन्होंने शिकायत जारी रखी तो उनके खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी और पुलिस उन्हें उठाकर ले जाएगी। इस आरोप के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
फिलहाल छात्राओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अधीक्षिका के खिलाफ उचित कार्रवाई करने, छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार लाने तथा छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं, प्रशासन की ओर से मामले की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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