गांधीनगर। गुजरात सरकार ने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के अतिरिक्त बोझ से राहत दिलाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वजा ने शनिवार, 17 अक्टूबर को गांधीनगर में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षकों के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों पर बढ़ते प्रशासनिक कार्यों, विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर डेटा एंट्री और अन्य विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर चिंता जताई। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को इन कार्यों का बोझ कम करने के लिए विशेष समिति बनाने का निर्देश दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाने के लिए अधिक समय उपलब्ध कराना और विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
शिक्षकों के अतिरिक्त काम को लेकर उच्चस्तरीय बैठक
गांधीनगर में आयोजित बैठक में शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वजा ने प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को सौंपे जा रहे विभिन्न कार्यों की समीक्षा की।बैठक में विशेष रूप से शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों, ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करने और अलग-अलग सरकारी विभागों द्वारा सौंपे जाने वाले कार्यों पर चर्चा हुईशिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। ऐसे में जरूरी है कि उन्हें पढ़ाई से संबंधित गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय मिले।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्यों का विस्तृत अध्ययन किया जाए और अनावश्यक जिम्मेदारियों को कम करने के उपाय तलाशे जाएं।
गैर-शैक्षणिक कार्यों की समीक्षा के लिए बनेगी विशेष समिति
शिक्षा मंत्री ने बैठक में शिक्षकों के काम का बोझ कम करने के लिए एक विशेष समिति गठित करने का निर्देश दिया।इस समिति में शिक्षा विभाग, गुजरात शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (GCERT), समग्र शिक्षा और स्कूल आयुक्त कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।समिति शिक्षकों को सौंपे जाने वाले प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का अध्ययन करेगी।इसके अलावा विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी अपलोड करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन कार्यों को आसान बनाया जा सकता है।समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर सरकार आगे के निर्णय लेगी।
ऑनलाइन डेटा एंट्री के बोझ को कम करने पर जोर
वर्तमान समय में शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा अनेक प्रकार के ऑनलाइन कार्य भी करने पड़ते हैं।इनमें विद्यार्थियों की उपस्थिति, शैक्षणिक जानकारी, सरकारी योजनाओं से संबंधित रिकॉर्ड और विभिन्न विभागों द्वारा मांगी जाने वाली सूचनाएं शामिल हो सकती हैं।अलग-अलग पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करने में समय लगने से शिक्षकों की नियमित शिक्षण गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका रहती है।सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए मौजूदा डिजिटल प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।हालांकि, अभी किसी विशेष पोर्टल को बंद करने या किसी अनिवार्य डेटा एंट्री प्रक्रिया को समाप्त करने की घोषणा नहीं हुई है।
शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाने के लिए मिलेगा अधिक समय
राज्य सरकार की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों का समय बचाना है, ताकि वे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकेंशिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का मूल्यांकन, कमजोर छात्रों की मदद और विभिन्न शिक्षण गतिविधियों की योजना भी बनाते हैं।ऐसे में प्रशासनिक कार्यों का बोझ कम होने से उन्हें विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझने और बेहतर शिक्षण पद्धतियां अपनाने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।सरकार का मानना है कि शिक्षकों के कार्यों का बेहतर प्रबंधन विद्यार्थियों के हित में उपयोगी साबित होगा।
डिजिटल व्यवस्था में सुधार की भी चल रही पहल
गुजरात सरकार ने हाल के महीनों में शिक्षकों से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए कुछ डिजिटल पहल भी की हैं।राज्य में 'सेवा समाधान' पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से शिक्षक वेतन, अवकाश, भविष्य निधि और अन्य सेवा संबंधी मामलों की शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।इसका उद्देश्य शिक्षकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है।इसके अलावा प्राथमिक शिक्षा विभाग से जुड़े दो लाख से अधिक कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट तैयार करने और उसकी समीक्षा की प्रक्रिया भी ऑनलाइन करने की घोषणा की गई है।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला
शिक्षा विभाग की प्रस्तावित विशेष समिति शिक्षकों की जिम्मेदारियों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।रिपोर्ट में यह बताया जा सकता है कि किन कार्यों को सरल बनाने, एकीकृत करने या वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से पूरा करने की आवश्यकता हैसरकार रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी।फिलहाल समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट जमा करने की अंतिम समयसीमा की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
गुजरात के हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद
गुजरात में बड़ी संख्या में शिक्षक सरकारी और निजी विद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करने से विद्यालयों के दैनिक कामकाज में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वजा के निर्देशों के बाद अब विभागीय अधिकारियों की समिति और उसकी सिफारिशों पर नजर रहेगी।सरकार का प्रयास है कि शिक्षक अपना अधिकतम समय विद्यार्थियों की शिक्षा और शैक्षणिक विकास में लगा सकें। हालांकि, वास्तविक राहत कितनी मिलेगी, यह समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर लागू किए जाने वाले निर्णयों से स्पष्ट होगा।
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