पानीपत। हरियाणा के पानीपत स्थित पार्क अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सड़क हादसे में पैर में फ्रैक्चर के बाद भर्ती कराई गई महिला के इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनकी अनुमति के बिना दिल में स्टेंट डाल दिया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
मामला जीटी रोड स्थित पार्क अस्पताल का है, जहां रमेश नगर निवासी गुड्डी देवी (42) को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, 24 जुलाई को गाजियाबाद में हुए सड़क हादसे में गुड्डी देवी के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। हादसे के बाद उन्हें उपचार के लिए पानीपत के पार्क अस्पताल लाया गया था।
परिजनों का आरोप है कि महिला को पैर की चोट के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने बिना परिवार की सहमति के उनके दिल से जुड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी। उनका दावा है कि पैर के ऑपरेशन के बजाय डॉक्टरों ने महिला के दिल में स्टेंट डाल दिया। इसके बाद महिला की हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और शव लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर गए।
मामले में सेक्टर-29 थाना पुलिस ने अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज और डॉक्टरों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मृतका के बेटे कुलदीप ने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के काशीपुर गांव का रहने वाला है और पिछले करीब 15 वर्षों से पानीपत में रह रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मां को पैर में चोट लगने के बाद अस्पताल लाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान ऐसी प्रक्रिया की गई जिसकी जानकारी परिवार को नहीं दी गई।
वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। अस्पताल की सीईओ सपना भांबरी ने कहा कि महिला के इलाज के दौरान जांच में हृदय संबंधी समस्या सामने आई थी। उन्होंने दावा किया कि दिल में स्टेंट डालने से पहले परिवार की सहमति ली गई थी और सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार की गईं।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि महिला की हालत पहले से गंभीर थी और डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक उपचार किया। हालांकि, परिजन इस दावे से सहमत नहीं हैं और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस घटना के बाद एक बार फिर निजी अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया, मरीजों के परिजनों की सहमति और मेडिकल लापरवाही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज के दौरान कोई लापरवाही हुई थी या नहीं।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की निगाहें भी इस मामले पर बनी हुई हैं। महिला के परिजन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रबंधन अपने ऊपर लगे आरोपों को नकार रहा है।