शिमला। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाते हुए उनसे नैतिक जिम्मेदारी लेने और अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम हटाए जाने का मामला बेहद गंभीर है। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में न्याय करेगा और देश के नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने की जिम्मेदारी होती है।शर्मा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि उन्हें इस पूरे विवाद की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।उन्होंने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। उन्हें स्वयं अपने पद से हट जाना चाहिए। यह जिद का सवाल नहीं है।"आनंद शर्मा का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने का भरोसा
आनंद शर्मा ने मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए देश की सर्वोच्च अदालत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि भारत का सुप्रीम कोर्ट इस मामले में न्याय करेगा और देश की जनता को आश्वस्त करेगा कि भारतीय मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।"कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाया जाना गंभीर चिंता का विषय है।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर जारी विवाद
देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी राजनीतिक दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे विशेष रूप से गरीब, प्रवासी और कमजोर वर्ग के मतदाताओं के प्रभावित होने की आशंका है।हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से मृत, दोहराए गए और अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाना तथा सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया का उद्देश्य है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं।इन याचिकाओं में चुनाव आयोग के फैसलों की वैधानिकता, मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और संबंधित नियमों पर सवाल उठाए गए हैं।सितंबर में दाखिल एक याचिका में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग की गई थी। हालांकि, यह याचिकाकर्ताओं का दावा है और इसे सभी प्रभावित व्यक्तियों के मतदान अधिकार समाप्त होने का न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का किया समर्थन
आनंद शर्मा ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे नागरिकों और छात्र संगठनों के अधिकारों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है।उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को रोकना उचित नहीं है। लोकतंत्र में लोगों को अपनी चिंताओं और मांगों को संवैधानिक तरीके से उठाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था। पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में मामले भी दर्ज किए हैं।
शिमला के कालीबाड़ी मंदिर में की पूजा-अर्चना
इससे पहले आनंद शर्मा ने शिमला के कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की और देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।उन्होंने कहा कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश के लोगों के कल्याण, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना की है। इसी दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
चुनावी पारदर्शिता को लेकर बढ़ी बहस
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।एक ओर विपक्षी दल मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग पुनरीक्षण प्रक्रिया को मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक बता रहा है।अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत के निर्णय से मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया और उससे जुड़े कानूनी सवालों पर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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