शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण समारोह को लेकर उठे विवाद के बीच लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को अपनी नाराजगी की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सराहन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के शामिल नहीं होने से उन्हें कोई मलाल नहीं है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजनों को राजनीतिक मतभेद या चुनावी नफे-नुकसान के नजरिए से देखना उचित नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने लगातार चुनावों में उन्हें पहले से अधिक मतों के अंतर से समर्थन दिया है।
मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी पर क्या बोले विक्रमादित्य सिंह?
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में विक्रमादित्य सिंह ने सराहन में आयोजित कार्यक्रम को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की गैरमौजूदगी को लेकर वह नाराज नहीं हैं।उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वीरभद्र सिंह की स्मृति में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें कांग्रेस के राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने भाग लिया है।विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि किसी कार्यक्रम में किसी नेता की उपस्थिति या अनुपस्थिति को हमेशा राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
सराहन में हुआ वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को शिमला जिले के सराहन में किया गया था।बुशहर स्पोर्ट्स, कल्चर एंड एनवायरनमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री की आठ फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई।कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अलावा विक्रमादित्य सिंह, प्रतिभा सिंह और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने समारोह में भाग लिया।वीरभद्र सिंह की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उनके समर्थक और स्थानीय लोग भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर भाजपा ने उठाए सवाल
प्रतिमा अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं का कार्यक्रम में शामिल नहीं होना कांग्रेस के भीतर मतभेदों का संकेत है।उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के महत्वपूर्ण नेता रहे हैं और उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है।हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि इस आयोजन को गुटबाजी से जोड़ना उचित नहीं है।
चुनावी नफे-नुकसान से जोड़ना सही नहीं
विक्रमादित्य सिंह ने अपने बयान में कहा कि राजनीतिक घटनाक्रमों का आकलन केवल चुनावी फायदे या नुकसान के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें लगातार चुनावों में समर्थन दिया है और उनकी जीत का अंतर भी पहले की तुलना में बढ़ा है।उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत और कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संबंधी चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि सराहन में आयोजित समारोह का उद्देश्य पूर्व मुख्यमंत्री के योगदान को याद करना और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना था।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी गुटबाजी के आरोप किए खारिज
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी बुधवार को भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। शिमला के संजौली हेलीपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण को पार्टी की आंतरिक राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरभद्र सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और प्रदेश के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।उन्होंने भाजपा की ओर से लगाए गए गुटबाजी के आरोपों को गलत बताते हुए विपक्षी दल के भीतर ही कई गुट होने का दावा किया।
वीरभद्र सिंह की विरासत का हिमाचल की राजनीति में महत्व
वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे थे। प्रदेश की राजनीति में उनका लंबा अनुभव और व्यापक जनाधार रहा है।उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह भी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रही हैं।सराहन में स्थापित प्रतिमा को वीरभद्र सिंह की राजनीतिक और सामाजिक विरासत के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।फिलहाल विक्रमादित्य सिंह और मुख्यमंत्री सुक्खू दोनों ने कार्यक्रम को लेकर नाराजगी तथा गुटबाजी की चर्चाओं को खारिज किया है। इसके बावजूद प्रतिमा अनावरण समारोह में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
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