Kangra district कांगड़ा जिले के दूर-दराज के इलाकों, छोटा भंगाल और बड़ा भंगाल में स्थित धौलाधार वन्यजीव अभयारण्य (Dhauladhar Wildlife Sanctuary) में जाने वाले पर्यटकों को अब प्रवेश शुल्क देना होगा और वन विभाग से पहले अनुमति लेनी होगी। राज्य सरकार ने 6 जून को कुछ नियम अधिसूचित किए थे, जिन्हें लागू करने के लिए वन विभाग ने कदम उठाए हैं। इन नियमों के तहत, अभयारण्य में आने और वहां से जाने वाले सभी पर्यटकों के लिए पंजीकरण (registration) कराना अनिवार्य कर दिया गया है। नए शुल्क ढांचे के अनुसार, भारतीय पर्यटकों को पहले तीन दिनों के लिए 300 रुपये प्रतिदिन और उसके बाद 500 रुपये प्रतिदिन का शुल्क देना होगा। विदेशी पर्यटकों के लिए यह शुल्क पहले तीन दिनों के लिए 600 रुपये प्रतिदिन और उसके बाद 1,000 रुपये प्रतिदिन होगा। फोटोग्राफी के लिए अलग से शुल्क देना होगा।
स्टिल कैमरे का उपयोग करने वाले भारतीय पर्यटकों को पहले तीन दिनों के लिए 625 रुपये और उसके बाद 1,250 रुपये प्रतिदिन का शुल्क देना होगा। विदेशी पर्यटकों के लिए यही शुल्क क्रमशः 1,250 रुपये और 2,500 रुपये प्रतिदिन होगा। स्कूली छात्रों को निर्धारित शुल्क पर 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। ड्रोन फोटोग्राफी के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी, जबकि कमर्शियल फोटोग्राफी और फिल्मिंग के लिए 10,000 रुपये से लेकर 75,000 रुपये प्रतिदिन तक का शुल्क देना होगा।
इन नए नियमों को लागू करने के लिए, वन विभाग ने अपने राजगुंधा कार्यालय में एक कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम पर्यटकों के पंजीकरण को प्रबंधित करने और अभयारण्य में आने-जाने वालों पर नज़र रखने में मदद करेगा। बड़ा भंगाल के निवासियों और घरेलू इस्तेमाल के लिए छोटे-मोटे वन उत्पाद (minor forest produce) इकट्ठा करने वाले लोगों को प्रवेश शुल्क से छूट दी गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों को भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। वन विभाग बड़ा भंगाल के निवासियों का पंजीकरण करने की भी योजना बना रहा है, ताकि चंबा की ओर जाने वाले लोगों की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सके।
प्रवेश अनुमति (entry permit) की एडवांस बुकिंग और अभयारण्य के बारे में रियल-टाइम जानकारी देने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि यह वेबसाइट जल्द ही लॉन्च कर दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि तय नियमों का उल्लंघन करने पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करना और वन्यजीव संरक्षण के उपायों को मजबूत बनाना है। साथ ही, अनिवार्य पंजीकरण से विभाग को उन पर्यटकों का रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी जो दुर्गम और कठिन इलाकों से होकर गुजरते हैं।