सेब उत्पादकों को मौसम की मार से मिलेगी सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर में लागू होगी फसल बीमा योजना
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सेब और अन्य बागवानी फसलों को मौसम की मार से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू करने की तैयारी में है। कृषि उत्पादन मंत्री जावेद अहमद डार ने विधानसभा में बताया कि योजना से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। हालांकि केंद्र सरकार के स्तर पर योजना के दिशानिर्देशों में संशोधन की प्रक्रिया के कारण फिलहाल इसके क्रियान्वयन को रोका गया है। केंद्र से संशोधित दिशानिर्देश मिलने के बाद योजना को लागू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में बागवानी क्षेत्र, विशेष रूप से सेब उत्पादन, बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। ओलावृष्टि, भारी बारिश, असमय वर्षा, तापमान में अचानक बदलाव और दूसरी मौसम संबंधी घटनाओं के कारण किसानों और बागवानों को कई बार भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे नुकसान की स्थिति में बीमा सुरक्षा मिलने से उत्पादकों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
विधानसभा में इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए कृषि उत्पादन मंत्री जावेद अहमद डार ने कहा कि सरकार ने मौसम आधारित फसल बीमा योजना से जुड़ी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। योजना को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं पर काम किया जा चुका है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा संबंधित नियमों और दिशानिर्देशों में बदलाव किए जाने के कारण अभी अंतिम क्रियान्वयन का इंतजार है।
मंत्री ने बताया कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मौसम आधारित फसल बीमा योजना से संबंधित विषयों पर विचार करने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन किया था। जम्मू-कश्मीर सरकार को जानकारी मिली है कि समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। अब केंद्र सरकार की ओर से अंतिम सूचना और संशोधित दिशानिर्देश मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है।
डार ने कहा कि केंद्र से नई गाइडलाइन प्राप्त होते ही जम्मू-कश्मीर में योजना को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य फल उत्पादकों को बदलते मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों से होने वाले वित्तीय नुकसान के खिलाफ सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपने 2026-27 के बजट दस्तावेज में भी बागवानी फसलों के लिए पुनर्गठित मौसम आधारित बीमा योजना लागू करने की घोषणा की थी। इसमें पारंपरिक और हाई डेंसिटी दोनों तरह के सेब के साथ कश्मीर संभाग में केसर तथा अन्य क्षेत्रों की कुछ बागवानी फसलों को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाने की बात कही गई है।
मौसम आधारित फसल बीमा व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से जुड़े जोखिम के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा देना है। बागवानी फसलों के मामले में यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फल तैयार होने से पहले किसी गंभीर मौसमी घटना के कारण पूरे सीजन की मेहनत प्रभावित हो सकती है।
विशेष रूप से सेब के बागानों के लिए ओलावृष्टि और असामान्य बारिश बड़ी चुनौती बन सकती है। फूल आने से लेकर फल तैयार होने और कटाई तक अलग-अलग चरणों में मौसम की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में उत्पादकों को बाजार में मिलने वाली कीमत और कुल आय पर असर पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर में पारंपरिक सेब बागानों के साथ हाई डेंसिटी बागवानी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे बागानों में किसानों का शुरुआती निवेश अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इसलिए प्राकृतिक या मौसम संबंधी जोखिम से फसल प्रभावित होने पर आर्थिक नुकसान भी गंभीर हो सकता है। बीमा व्यवस्था ऐसे जोखिमों के खिलाफ अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकती है।
सरकार पहले से कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का विस्तार कर रही है। जम्मू-कश्मीर के 2026-27 बजट दस्तावेज के अनुसार यह योजना सभी 20 जिलों में लागू की गई है और बागवानी फसलों तक बीमा कवरेज बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
हालांकि मौसम आधारित बीमा योजना कब से लागू होगी, इसकी निश्चित तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है। कृषि उत्पादन मंत्री के बयान के मुताबिक इसका अगला चरण केंद्र सरकार के संशोधित दिशानिर्देशों पर निर्भर करेगा। नए नियम मिलने के बाद सरकार को उनके अनुरूप क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
योजना लागू होने के बाद इसके दायरे में आने वाली फसलों, किसानों की पात्रता, प्रीमियम, बीमा अवधि और नुकसान के आकलन सहित अन्य शर्तों की विस्तृत तस्वीर भी स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसलिए किसानों के लिए केंद्र के संशोधित दिशानिर्देश महत्वपूर्ण होंगे।
सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर के किसानों और फल उत्पादकों को मौसम की बढ़ती अनिश्चितता से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। बागवानी प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण किसी बड़े मौसमी नुकसान का असर केवल व्यक्तिगत किसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़े व्यापार, परिवहन और दूसरे क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल जम्मू-कश्मीर सरकार केंद्र सरकार की अंतिम सूचना का इंतजार कर रही है। सलाहकार समिति की रिपोर्ट सौंपे जाने की जानकारी मिलने के बाद अब संशोधित दिशानिर्देशों पर नजर है। केंद्र से हरी झंडी मिलते ही सरकार मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। इससे विशेष रूप से सेब उत्पादकों को ओलावृष्टि, भारी बारिश और अन्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से होने वाले नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।