श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी अधिकारियों को एक से अधिक आधिकारिक वाहन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर गुरुवार को विधानसभा में तीखी चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने नई वाहन नीति लागू करने में हो रही देरी को लेकर परिवहन मंत्री सतीश शर्मा से जवाब मांगा। उन्होंने सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को जरूरत से ज्यादा वाहन उपलब्ध कराने को गंभीर विषय बताया।

यह मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक रणबीर सिंह पठानिया के सवाल पर उठा। पठानिया ने सरकार से पूछा कि क्या सभी सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बोर्डों और स्वायत्त संस्थाओं में ‘एक अधिकारी-एक वाहन’ की सीमा लागू की गई है या सरकार इसे लागू करने की योजना बना रही है।

जवाब में परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने सदन को बताया कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर सरकार के सभी विभागों में किसी अधिकारी को सरकारी वाहन आवंटित करने या अपने पास रखने के लिए एक समान सीमा निर्धारित करने वाली कोई नीति लागू नहीं है। हालांकि सरकार एक संशोधित कार नीति पर विचार कर रही है, जिसमें ‘एक वाहन-एक अधिकारी’ का सिद्धांत प्रस्तावित किया गया है।

नई नीति में अपवाद का भी प्रावधान

परिवहन मंत्री के मुताबिक प्रस्तावित नीति में सभी परिस्थितियों में एक ही नियम लागू नहीं होगा। सुरक्षा जरूरतों, फील्ड ड्यूटी, अतिरिक्त जिम्मेदारी या प्रभार, परिचालन आवश्यकताओं और संबंधित विभाग की कार्यात्मक जरूरतों के आधार पर कुछ अपवाद रखे जा सकते हैं।

सरकार का कहना है कि संशोधित नीति को मंजूरी मिलने के बाद इसे संबंधित सरकारी विभागों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बोर्डों और स्वायत्त संस्थाओं में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को तर्कसंगत बनाना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

मंत्री का जवाब सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष राथर ने मामले में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि जब उच्चस्तरीय स्तर पर इस विषय पर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है तो अंतिम निर्णय में इतनी देरी क्यों हो रही है।

24 दिन में क्या किया, स्पीकर ने पूछा

राथर ने सदन में कहा कि संबंधित रिपोर्ट एक सितंबर को सरकार के पास पहुंच चुकी थी। उन्होंने मंत्री से पूछा कि इसके बाद 24 दिनों में क्या कार्रवाई की गई और फैसला लेने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इस मामले को सुलझाने में सरकार को और दो महीने लगेंगे।

स्पीकर ने एक अधिकारी के पास दो विभागों का प्रभार होने की स्थिति में अलग-अलग सरकारी वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि यदि एक अधिकारी दो विभागों का प्रभार संभाल रहा है तो वह दोनों जिम्मेदारियों के लिए एक ही सरकारी वाहन का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकता।

राथर ने सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्र में सरकारी संसाधनों को अधिकारियों की अनावश्यक सुविधाओं पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया।

मंत्री ने बताया ‘विरासत में मिला मुद्दा’

स्पीकर के सवालों के जवाब में परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने इस व्यवस्था को पुराना यानी ‘लेगेसी इश्यू’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार मामले की समीक्षा करेगी और आवश्यक सुधार पर विचार किया जाएगा।

इस पर राथर ने सवाल किया कि अगर कोई पुरानी व्यवस्था गलत है तो क्या केवल उसके वर्षों से चले आने के कारण उसे जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने मंत्री को मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान ही मामले में की गई कार्रवाई और प्रस्तावित नीति की स्थिति पर विस्तृत जानकारी सदन के सामने रखने को कहा।

सतीश शर्मा ने सदन को आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे।

कई विभागों का प्रभार संभालने वाले अधिकारी मुद्दे के केंद्र में

बहस का मुख्य विषय ऐसे अधिकारी रहे जिनके पास एक से अधिक विभागों का अतिरिक्त प्रभार है। सवाल यह है कि क्या अतिरिक्त विभाग की जिम्मेदारी मिलने पर संबंधित अधिकारी को उस विभाग का अलग सरकारी वाहन भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

स्पीकर ने इसी व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए संसाधनों के तर्कसंगत इस्तेमाल की जरूरत बताई। सरकार की प्रस्तावित नीति इसी समस्या को व्यापक स्तर पर संबोधित करने की कोशिश करती है। हालांकि सुरक्षा, फील्ड ड्यूटी और विशेष परिचालन जरूरतों वाले पदों को इससे अपवाद मिल सकता है।

अभी लागू नहीं है एक समान सीमा

सरकार के लिखित जवाब से यह भी स्पष्ट हुआ कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर के सभी विभागों में सरकारी वाहनों के आवंटन को लेकर ‘एक अधिकारी-एक वाहन’ की कोई समान सीमा लागू नहीं है।

नई नीति लागू होने पर अलग-अलग विभागों में सरकारी वाहनों के आवंटन और इस्तेमाल के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार हो सकता है। सरकार के अनुसार प्रस्ताव का उद्देश्य वाहनों का बेहतर उपयोग करना और उपलब्ध संसाधनों को व्यवस्थित करना है।

मौजूदा सत्र में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

विधानसभा अध्यक्ष ने परिवहन मंत्री को मामले को लंबित नहीं रखने और मौजूदा सत्र में ही विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का मौजूदा शरदकालीन सत्र 21 से 30 सितंबर तक निर्धारित है।

अब परिवहन विभाग की विस्तृत रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि संशोधित वाहन नीति किस चरण में है, इसे मंजूरी मिलने में कितना समय लग सकता है और ‘एक वाहन-एक अधिकारी’ के सिद्धांत को किस स्वरूप में लागू किया जाएगा।

सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि किन परिस्थितियों में एक अधिकारी को अतिरिक्त वाहन देने की अनुमति होगी और ऐसी छूट देने की प्रक्रिया क्या होगी। फिलहाल नीति विचाराधीन है और अंतिम स्वरूप सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।

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